महाराष्ट्र विधान भवन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Zilla Parishad Nominated Members: महाराष्ट्र में महानगरपालिका और नगरपालिकाओं की तरह अब जिला परिषदों और पंचायत समितियों में भी ‘स्वीकृत सदस्यों’ की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए महाराष्ट्र जिला परिषद एवं पंचायत समिति (द्वितीय संशोधन) विधेयक को मंगलवार को विधानसभा में सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इस विधेयक के कानून बनने के बाद जिला परिषदों में 201 नए सदस्यों की वृद्धि होगी, जबकि पंचायत समितियों में 804 लोगों को नामित सदस्य के रूप में नियुक्त करने का मार्ग खुल जाएगा।
ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में सामाजिक क्षेत्र और विभिन्न तकनीकी विषयों के विशेषज्ञों का अनुभव प्रशासन को मिल सके, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने यह विधेयक सदन में चर्चा के लिए पेश किया था। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, जिला परिषद में निर्वाचित कुल सदस्यों की संख्या के 10 प्रतिशत या कम से कम 5 सदस्यों को स्वीकृत किया जाएगा। इसी तरह पंचायत समिति में निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या के 20 प्रतिशत या कम से कम 1 सदस्य को स्वीकृत करने की व्यवस्था की गई है।
इसके चलते महाराष्ट्र की 34 जिला परिषदों में 2,012 निर्वाचित सदस्यों के साथ अब 201 स्वीकृत सदस्य कार्यरत होंगे। वहीं 301 पंचायत समितियों में 4,024 सदस्यों के साथ 804 नामित सदस्यों की संख्या बढ़ेगी। इन स्वीकृत सदस्यों को प्रशासनिक कार्यों में सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन देने का अधिकार होगा, लेकिन उनके राजनीतिक अधिकार सीमित रहेंगे। उन्हें किसी भी प्रस्ताव पर मतदान का अधिकार नहीं होगा और वे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति या उपसभापति जैसे पदों के लिए पात्र नहीं होंगे। उनका कार्यकाल संबंधित परिषद या समिति की अवधि के साथ ही समाप्त होगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अभिजीत पाटिल, भाजपा के विक्रम पाचपुते और हरिश पिंपले, कांग्रेस के नाना पटोले, शिवसेना के सुहास बाबर और प्रतापराव पाटिल-चिखलीकर, तथा शेकाप के बाबासाहेब देशमुख-ने अपने विचार रखे। विधेयक का स्वागत करते हुए ग्राम पंचायतों में भी ऐसे नामित सदस्यों की नियुक्ति की मांग की गई।
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इन सदस्यों का नामांकन जिलाधिकारी के माध्यम से किया जाएगा। नामांकन करते समय संबंधित सदन में राजनीतिक दलों के संख्याबल को आधार बनाया जाएगा। दलों के नेताओं से चर्चा कर उनके अनुपात में सीटों का बंटवारा होगा। नियुक्त सदस्यों के नाम राज्य चुनाव आयोग द्वारा राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे।