Modi Macron Meeting 2026 (फोटो क्रेडिट-X)
Rafale Deal India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मुंबई में हो रही द्विपक्षीय बैठक केवल कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की सैन्य और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस बैठक का केंद्र बिंदु ‘मेक इन इंडिया’ के तहत दुनिया के सबसे घातक हथियारों का भारत में निर्माण है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों पर चर्चा के साथ, भारत और फ्रांस की यह रणनीतिक साझेदारी अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जहाँ राफेल से लेकर स्कॉर्पीन पनडुब्बियों तक का निर्माण भारतीय धरती पर होगा।
इस बैठक में सबसे अधिक ध्यान 114 राफेल फाइटर जेट्स की मेगा डील पर है, जिसके लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने पहले ही हरी झंडी दे दी है। यह समझौता न केवल वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।
VIDEO | Mumbai: MEA spokesperson Randhir Jaiswal (@MEAIndia) says. “The President of France, Emmanuel Macron has arrived in the city of Mumbai. He arrived yesterday late in the evening. There are two aspects to his visit to India this time. One, he will be holding bilateral talks… pic.twitter.com/EG8R1OCZFe — Press Trust of India (@PTI_News) February 17, 2026
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील है। इस मेगा प्लान की सबसे खास बात यह है कि इनमें से केवल 18 जेट्स ही सीधे फ्रांस से बनकर आएंगे, जबकि शेष 96 जेट्स का निर्माण पूरी तरह भारत में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा। इन विमानों में 60% पुर्जे भारतीय होंगे और इन्हें भारतीय हथियारों व मिसाइलों से लैस किया जाएगा। इसके अलावा, भारत 24 ‘सुपर राफेल’ (F-5 वर्जन) भी खरीदेगा। यह संस्करण इतना आधुनिक है कि फिलहाल फ्रांस भी इसे विकसित कर रहा है और इसकी डिलीवरी 2030 के बाद शुरू होने की उम्मीद है।
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हवाई ताकत के साथ-साथ मारक क्षमता को और सटीक बनाने के लिए ‘हैमर’ (AASM Hammer) मिसाइल पर बड़ी डील होने की संभावना है। यह एक अत्यंत सटीक एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल है जो दुश्मन के बंकरों को नेस्तनाबूद कर सकती है। भारत अब इसे न केवल राफेल में एकीकृत करना चाहता है, बल्कि इसका संयुक्त निर्माण भी भारत में करने की योजना है। साथ ही, एयरबस हेलीकॉप्टर्स के साथ मिलकर भारत में ही हेलीकॉप्टर्स की असेंबली लाइन स्थापित करने पर चर्चा होगी, जिससे भारतीय सेना को आधुनिक हेलीकॉप्टर मिलेंगे और बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा।
नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट-75 के तहत अतिरिक्त 3 स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वर्तमान में 6 में से 5 पनडुब्बियां पहले ही नौसेना का हिस्सा बन चुकी हैं और मुंबई के मझगांव डॉक में इनके निर्माण का अनुभव भारत के काम आएगा। नई पनडुब्बियों में अधिक स्वदेशी तकनीक और बेहतर ‘स्टेल्थ’ (छिपने की क्षमता) फीचर्स होंगे। फ्रांस के साथ यह सहयोग भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा, जहाँ पनडुब्बियां समुद्र की गहराइयों में छिपकर दुश्मन की निगरानी और उन पर सटीक हमला करने में सक्षम होंगी।