JNPA पोर्ट पर दिख रहा अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, ड्राइवरों की कमी से कंटेनर मूवमेंट प्रभावित
JNPA Crisis: पश्चिम एशिया में बढते तनाव और ट्रेलर चालकों की कमी के कारण जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर कंटेनर ट्रांसपोर्ट प्रभावित हो रहा है। पोर्ट प्रशासन स्थिति कोसंभालने के प्रयास में जुटा है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
JNPA पोर्ट (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
JNPA Hit By Driver Crisis: देश के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट्स में शामिल नवी मुंबई स्थित बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) पर अब ट्रेलर ड्राइवरों की कमी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। न्हावा शेवा पोर्ट पर कंटेनर आवाजाही धीमी पड़ने से आयात-निर्यात गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। हालात ऐसे बन रहे हैं कि टर्मिनलों पर कंटेनरों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत के कुल कंटेनर कार्गो वॉल्यूम का लगभग 50 प्रतिशत संभालने वाले इस पोर्ट पर बढ़ती देरी ने व्यापार जगत की चिंता भी बढ़ा दी है।
पोर्ट पर बढ़ रहा कंटेनरों का दबाव
ट्रेलर चालकों की कमी के कारण टर्मिनलों से कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (CFS) तक माल पहुंचाने की रफ्तार धीमी हो गई है। इसके चलते टर्मिनल यार्ड में आयातित कंटेनरों का स्टॉक तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्रशासन का कहना है कि पोर्ट संचालन अभी सामान्य है, लेकिन बढ़ते दबाव को संभालने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ग्रीन चैनल के जरिए साझा वाहनों से कंटेनर ट्रांसपोर्ट, रेल परिवहन क्षमता बढ़ाने और व्यापारियों को अतिरिक्त सहायता देने जैसे कदम उठाए गए हैं।
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व्यापारिक चिंता के बीच राहत प्रयास
पोर्ट प्रशासन ने आयातकों को राहत देने के लिए नई सुविधा भी शुरू की है। जिन व्यापारियों ने पहले कंटेनर फ्रेट स्टेशन डिलीवरी का विकल्प चुना था, वे अब ‘डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी’ के जरिए सीधे पोर्ट से अपना माल क्लियर करवा सकेंगे। इससे कंटेनर क्लियरेंस तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, व्यापारियों का मानना है कि अगर ट्रेलर ड्राइवरों की कमी और खाड़ी क्षेत्र का संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है और देश के आयात-निर्यात कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
