लागत में 28 करोड़ का गोलमाल, 8 साल से अकोला की जनता बेहाल, ROB मामले में हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Akola ROB Case: अकोला के तापड़िया नगर आरओबी निर्माण में पीडब्ल्यूडी और रेलवे के बजट में 28 करोड़ का अंतर मिलने पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने दोनों विभागों से हलफनामा मांगा है।
- Written By: केतकी मोडक
कोर्ट प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Akola Tapadia Nagar ROB Case: पिछले आठ वर्षों से अधूरे पड़े न्यू तापड़िया नगर रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण कार्य से परेशान अकोला शहरवासियों को अब न्यायपालिका से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 21 जुलाई को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में होगी। न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार और रेलवे मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए परियोजना की लागत में सामने आई 28 करोड़ रुपये की विसंगति पर शपथपत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
लागत के आंकड़ों में 28 करोड़ का बड़ा अंतर
सुनवाई के दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और रेलवे प्रशासन द्वारा प्रस्तुत लागत संबंधी आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। पीडब्ल्यूडी के अनुसार, प्रारंभ में 54 करोड़ रुपये की इस परियोजना की लागत बढ़कर 107 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि रेलवे मंत्रालय ने इसकी लागत 79 करोड़ रुपये बताई है। दोनों विभागों के दावों में 28 करोड़ रुपये का अंतर मिलने पर न्यायालय ने दोनों से विस्तृत जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता एड. नरेंद्र बेलसरे की ओर से एड. उज्ज्वल देशपांडे ने न्यायालय में पक्ष रखा। याचिका में बताया गया कि पिछले एक वर्ष से आरओबी क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक होने के कारण स्कूली विद्यार्थियों, मरीजों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को प्रतिदिन 7 से 8 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
Tiger Corridors के निर्धारण पर हाई कोर्ट सख्त; जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोडे ने दिए कड़े निर्देश
अंधेरी AC लोकल विवाद: TC को मिली क्लीन चिट, मराठी एकीकरण समिति ने जांच पर उठाए सवाल
बिना बताए गायब हुए, फिर भी नौकरी पक्की? अमरावती मनपा की ‘मेहरबानी’ पर सरकार का जोरदार ब्रेक
विदर्भ में मानसून की बेरुखी: आधी जुलाई बीतने के बाद भी नहीं बरसे बादल; गड़चिरोली-भंडारा में 50% से भी कम बारिश
यह भी पढ़ें:- अकोला के एडंली में कपास की फसल उखाड़ने पर दो पक्षों में खूनी संघर्ष, लाठी-डंडों से मारपीट, 1 गिरफ्तार
जनहित को देखते हुए अनामत राशि से मिली राहत
वैयक्तिक लाभ के उद्देश्य से दायर याचिकाओं पर रोक लगाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट नागपुर खंडपीठ ने प्रारंभ में याचिकाकर्ता को ढाई लाख रुपये की अनामत राशि जमा करने का निर्देश दिया था। हालांकि, एड. नरेंद्र बेलसरे ने यह मामला पूरी तरह जनहित और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा होने का तर्क रखा, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने उन्हें अनामत राशि जमा करने से विशेष छूट प्रदान कर दी।
अब 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार और रेलवे प्रशासन क्या जवाब देते हैं तथा आरओबी निर्माण कार्य को लेकर क्या दिशा तय होती है, इस पर पूरे अकोला शहर की नज़रें टिकी हुई हैं।
