मानवता शर्मसार: ‘कुतिया के साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश’, मुंबई में बढ़ रहा स्ट्रे डॉग्स पर यौन अपराध
Mumbai Stray Dog Abuse Case: मुंबई में आवारा कुत्तों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं। मलाड और कांदिवली में आरोपी पकड़े गए, लेकिन 50 रुपये के जुर्माने ने खड़े किए सवाल।
- Written By: अनिल सिंह
Dog Rape In Kandivali and Malad (फोटो क्रेडिट-X)
Dog Rape In Kandivali and Malad: मुंबई में पिछले कुछ महीनों के भीतर आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के साथ यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। मलाड और कांदिवली जैसे इलाकों से सामने आई हालिया घटनाओं ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है।
जहाँ एक ओर अपराधों की क्रूरता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पशु प्रेमियों का तर्क है कि मौजूदा कानूनी प्रावधान अपराधियों में डर पैदा करने के लिए बेहद कमजोर और अपर्याप्त हैं। पशु चिकित्सा क्लीनिकों की रिपोर्टों के अनुसार, यौन हिंसा के कारण गंभीर आंतरिक चोटों का शिकार होने वाले बेजुबान जानवरों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है।
मलाड और कांदिवली में रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी
मुंबई के उपनगरों में हाल ही में दो दिल दहला देने वाले मामले सामने आए। 18 जनवरी को मलाड के कुरार गांव में स्थानीय निवासियों ने 20 वर्षीय विकास पासवान को एक सार्वजनिक शौचालय के भीतर मात्र दो महीने के पिल्ले का उत्पीड़न करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। वहीं, 1 फरवरी को कांदिवली (पूर्व) के लोखंडवाला टाउनशिप में 40 वर्षीय संजय गौड़ को एक नाले के पास मादा कुत्ते के साथ कुकृत्य करते हुए पाया गया। दोनों ही मामलों में स्थानीय लोगों की सतर्कता से आरोपियों को पुलिस के हवाले किया गया।
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कानून की विफलता: “50 रुपये का जुर्माना और मौत का लाइसेंस”
इन घटनाओं ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA) की सीमाओं को उजागर कर दिया है।
अपर्याप्त धाराएं: पुलिस ने इन मामलों में बीएनएस की धारा 325 के तहत मामला दर्ज किया है, जो मुख्य रूप से जानवरों को मारने या जहर देने से संबंधित है। यह धारा विशेष रूप से यौन उत्पीड़न को परिभाषित नहीं करती।
नाममात्र का दंड: पीसीए अधिनियम की धारा 11(1)(ए) के तहत पहली बार अपराध करने पर मात्र 50 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। कार्यकर्ताओं ने इसे “जान से मारने का लाइसेंस” बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। उनका मानना है कि इतना कम जुर्माना अपराधियों के लिए किसी सजा के समान नहीं है।
मानसिक विकृति और सुरक्षा पर उठते सवाल
मनोवैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जानवरों के प्रति इस तरह की यौन विकृति समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।
बढ़ती क्रूरता: पशु आश्रयों की रिपोर्ट बताती है कि यौन उत्पीड़न के कारण आवारा कुत्तों को असहनीय दर्द और संक्रमण का सामना करना पड़ रहा है।
संभावित खतरा: विशेषज्ञों का कहना है कि जो व्यक्ति जानवरों के प्रति ऐसी हिंसक मानसिकता रखता है, वह भविष्य में बच्चों या महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।
मुंबई के जागरूक नागरिकों ने अब सरकार से मांग की है कि पशु क्रूरता कानूनों में तत्काल संशोधन कर उम्रकैद और भारी जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान शामिल किए जाएं ताकि बेजुबानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
