BJP Protest Against Harshvardhan Sapkal (फोटो क्रेडिट-X)
BJP Protest Against Harshvardhan Sapkal: महाराष्ट्र की राजनीति में टीपू सुल्तान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब हिंसक बयानों और कानूनी कार्रवाइयों के एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने के बाद राज्य भर में आक्रोश की लहर है। इस बयान के विरोध में अहिल्यानगर (अहमदनगर) में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मर्यादा की सीमा लांघते हुए सपकाल की जीभ काटने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने का विवादित ऐलान कर दिया है।
ऐतिहासिक तुलना के इस विवाद ने न केवल गठबंधन की राजनीति में दरार पैदा की है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
#WATCH | Maharashtra: Nagpur BJP Workers protest against Maharashtra Congress President Harshwardhan Sapkal for allegedly making remarks comparing Chhatrapati Shivaji Maharaj with Tipu Sultan. pic.twitter.com/y9Q9jQdcY9 — ANI (@ANI) February 15, 2026
इस पूरे विवाद की चिंगारी मालेगांव में डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद सुलगी थी। भाजपा ने इसे ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ बताते हुए कड़ा विरोध किया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने तस्वीर का बचाव करते हुए टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के समान योद्धा बता दिया। इस बयान के बाद भाजपा ही नहीं, बल्कि शिवसेना (UBT) के संजय राउत जैसे नेताओं ने भी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज की तुलना किसी से भी संभव नहीं है।
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अहिल्यानगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया। छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल के सामने प्रदर्शनकारियों ने हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ ‘जूता मारो’ आंदोलन किया। इसी दौरान जोश में आए कुछ स्थानीय नेताओं ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी कि जो कोई सपकाल की जीभ काटकर लाएगा, उसे पार्टी कार्यकर्ता अपनी ओर से 10 लाख रुपये का इनाम देंगे। इस भड़काऊ बयान के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तनाव और बढ़ गया है।
विवाद का असर पुणे में भी देखने को मिला, जहाँ भाजपा शहर अध्यक्ष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पार्वती पुलिस स्टेशन में सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
भाजपा का स्टैंड: भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की अस्मिता और गौरवशाली इतिहास का अपमान है।
कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और लोक शांति भंग करने की धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा अलर्ट: राज्य के कई संवेदनशील इलाकों में हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।