Konkan में हापुस आम का उत्पादन 75% घटा, सीजन 10 मई से पहले खत्म होने के आसार
Konkan में बेमौसम बारिश से हापुस आम का उत्पादन सिर्फ 25% रह गया है। कम आवक और बढ़ती कीमतों के बीच इस साल आम का सीजन जल्दी खत्म होने की संभावना है। खाड़ी में जंंग का असर आम के निर्यात पर भी हो रहा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
हापुस आम (सौ. सोशल मीडिया )
Konkan Hapus Mango Production: कोंकण में हापुस आम पर इस साल बेमौसम बारिश का बहुत बुरा असर पड़ा है, जिससे उत्पादन में काफी गिरावट आई है और सिर्फ लगभग 25 प्रतिशत ही उत्पादन हो सका है।
नतीजतन, यह साफ है कि इस साल का सीजन लिमिटेड रहेगा और ट्रेडर्स और आम उगाने वाले अंदाजा लगा रहे हैं कि यह हर साल से पहले, यानी 10 मई से पहले खत्म हो जाएगा।
हालांकि सीजन की शुरुआत से ही मार्केट में आवक कम रही है, लेकिन अब यह आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है। Konkan से हापुस के कुछ ही बॉक्स मार्केट में आ रहे हैं, और साउथ इंडिया से भी बड़ी संख्या में बॉक्स आने लगे हैं।
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हर साल इस दौरान लगभग एक लाख बॉक्स आते हैं; लेकिन, इस साल यह काफी कम हो गया है। मुंबई एपीएमसी के आम विक्रेताओं के मुताबिक, अभी कुल आवक लगभग 40 हजार बॉक्स तक पहुंच गई है और अगले कुछ दिनों में इसके 50 से 55 हजार बॉक्स तक जाने की संभावना है।
गुजरात और जुन्नर से शुरू होगी आम की आवक
इसका असर सीजन के अलग-अलग स्टेज पर भी देखने को मिल रहा है। मार्केट में आम की आवक 10 मई तक जारी रहने की संभावना है। उसके बाद देवगढ़ और सिंधुदुर्ग इलाकों से आम की अवेलेबिलिटी कम हो जाएगी, जबकि रत्नागिरी और दूसरे इलाकों से आम 25 मई तक मार्केट में रहेंगे। आम के ट्रेडर संजय पसारे का मानना है कि हालांकि गुजरात और जुन्नर से आम की आवक बाद में शुरू होगी, लेकिन कोकण में हापुस का सीजन इससे पहले खत्म हो जाएगा।
एक्सपोर्ट शुरू नहीं हो पाने से Konkan के हापुस आम पर हुआ असर
इस बीच, जहां कहा जा रहा है कि खाड़ी में जंग रुक गई है, वहीं अंदरूनी झगड़ों की वजह से समुद्री रास्तों से एक्सपोर्ट पर भारी असर पड़ा है। खाड़ी देशों को समुद्री रास्तों से एक्सपोर्ट अभी शुरू नहीं होने की वजह से Konkan और भारतीय आम इस साल खाड़ी देशों के जरूरी और बड़े मार्केट से चूक गए हैं।
इसके अलावा, बढ़ते ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की वजह से दूसरे देशों को एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ा है। यूरोप और अमेरिका के मार्केट में एक्सपोर्ट अभी पूरी कैपेसिटी से शुरू नहीं हुआ है और एयर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट काफी बढ़ गई है। यूएस के लिए इसकी कीमत करीब 600 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि यूरोपीय देशों के लिए यह करीब 400 रुपये प्रति किलोग्राम है, जिससे एक्सपोर्टर्स के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है।
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100 से 200 रुपये किलो दूसरे राज्यों के आम
- लोकल मार्केट में हापुस की अच्छी डिमांड होने की वजह से कीमत भी बढ़ रही है। क्वालिटी के हिसाब से एक बॉक्स की कीमत 2,000 से 6,000 रुपये और सबसे अच्छी क्वालिटी वाले आम 5,500 से 6,000 रुपये मिल रहे हैं।
- दूसरे राज्यों से आने वाले आम 100 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। इसके अलावा, बादामी और लालबाग जैसे आमों की दूसरी वैरायटी की आवक बढ़ रही है और उनकी कीमत क्रम से 80 से 110 रुपये और 70 से 100 रुपये प्रति किलो के बीच है।
- कुल मिलाकर, प्रोडक्शन में भारी गिरावट, कम आवक और बढ़ती कीमतों की वजह से इस साल का हापुस सीजन काफी कम समय का होगा और कस्टमर्स सीमित समय के लिए ही हापुस का मजा ले पाएंगे।
