नासिक: लासलगांव से हापुस आम ने भरी 'ग्लोबल' उड़ान, किसानों के लिए राहत

Nashik Lasalgaon Market: लासलगांव से हापूस और केसर आम का निर्यात शुरू, 4 टन प्रीमियम आम न्यूयॉर्क रवाना, वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय स्वाद फिर दुनिया में छाया।
Nashik: Haplus Mangoes from Lasalgaon Take 'Global' Flight—A Relief for Farmers
Nashik Mango Export USA( Source: Social Media )
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Nashik Hapus Mango Export USA: नासिक लासलगांव भारतीय हापूस आम का स्वाद और इसकी बेमिसाल खुशबू एक बार फिर सात समंदर पार दुनिया को अपना दीवाना बनाने के लिए तैयार है।

वैश्विक परिस्थितियों और खाड़ी देशों के तनाव के बावजूद, लासलगांव स्थित डॉ. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के कृषक विकिरण केंद्र से इस वर्ष आम का अंतरराष्ट्रीय निर्यात आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है, मंगलवार को 1100 बॉक्स में पैक लगभग 4 टन प्रीमियम हापूस और केसर आम अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के लिए शान से रवाना किया गया।

अमेरिकी वैज्ञानिकों की मुहर, निर्यात का रास्ता साफ

पिछले वर्ष प्रमाणन प्रक्रिया में कुछ तकनीकी देरी के कारण निर्यात बाधित रहा था, लेकिन इस वर्ष प्रशासन ने पहले ही कमर कस ली थी। अमेरिका के 2 वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों की टीम ने 8 दिन पूर्व इस केंद्र का बारीकी से निरीक्षण किया। केंद्र की अत्याधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों से संतुष्ट होने के बाद टीम ने आवश्यक प्रमाण पत्र जारी किए, जिससे निर्यात की राह आसान हो गई। वर्ष 2002 से 2006 तक इस केंद्र में केवल प्याज पर विकिरण प्रक्रिया की जाती थी, जबकि 2007 से आम के एक्सपोर्ट का सिलसिला शुरू हुआ।

इन खास किस्मों का होगा जलवा

निर्यात के लिए भारत की सर्वश्रेष्ठ किस्मों का चयन किया गया है, जिनमें शामिल हैं-हापूस और अल्फांसो (कोंकण की शान), केसर (गुजरात का स्वाद), बादाम, राजापुर और मल्लिका, हिमायत, दशहरा और वेगनपल्ली, लंगड़ा और चौसा।

गुजरात के केसर आम की भी चर्चा

वर्तमान में यह महत्वपूर्ण परियोजना हिंदुस्तान प्यो कोप लिमिटेड द्वारा संचालित की जा रही है- हिंदुस्तान एयों के प्रमुख भारत ढोकणे पाटिल और प्लांट इंचार्ज संजय आहेर ने बताया कि महाराष्ट्र के कोंकमा का असली हापूस और गुजरात का मशहूर केसर आम विकिरण प्रक्रिया के लिए केंद्र में पहुंच चुका है।

आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और मलेशिया को भी यहां से आम की सोप भेजी जाएगी, इस वर्ष 31 जून तक लगभग 3000 टन आम के निर्यात का अनुमान है, जिससे करोड़ों रुपये का विदेशी मुद्रा कारोबार होने की उम्मीद है।

कोकण के हापुस आम की विदेशों में भारी मांग के कारण समय रहते प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद माल को तैयार रखना पड़ता है। आने वाले में ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया और दिनों मलेशिया से भी मांग बढ़ने की संभावना के चलते अनुसंधान केंद्र में विशेष उपाय योजना की जा रही है। अगले 2 माह में लगभग 3000 टन आम का निर्यात होने की प्रबल संभावना है।

- भारत ढोकणे पाटिल, हिंदुस्तान एग्रो लि।

दुनिया के इन शहरों में है भारी डिमांड

भारतीय आमों की सबसे ज्यादा मांग अमेरिका के प्रमुख शहरों जैसे कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को, लॉस पंजिल्स, शिकागो, न्यू जर्सी और ह्यूस्टन में है।

इसके अलावा साउथ अफ्रीका और मलेशिया के बाजारों में भी भारतीय हापूस की घावा जमी हुई है। लासलगांव से शुरू हुए इस एक्सपोर्ट से न केवल विदेशी मुद्रा आएगी, बल्कि स्थानीय किसानों को भी अपनी उपज का बेहतरीन दाम मिल सकेगा।

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