मुंबई के आजाद मैदान में 57 दिनों से डटे शिक्षाकर्मी, अब महिलाएं करेंगी सामूहिक मुंडन; सरकार को दी चेतावनी
Maharashtra News: मुंबई के आजाद मैदान में पिछले 57 दिनों से जारी समग्र शिक्षा अभियान के कर्मचारियों का आंदोलन अब उग्र हो गया है। स्थायी सेवा की मांग को लेकर महिलाएं 8 मई को मुंडन कराएंगी।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Maharashtra Education Employees Protest: पिछले 20 से 25 वर्षों से स्थायी सरकारी सेवा की प्रतीक्षा कर रहे समग्र शिक्षा अभियान के हजारों कर्मचारियों का मुंबई के आजाद मैदान में चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लगातार 57 दिनों से जारी इस आंदोलन पर पूरे शिक्षा विभाग की नजर बनी हुई है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।
8 मई को सामूहिक मुंडन आंदोलन
शिक्षाकर्मियाें के आंदोलन में शामिल महिला कर्मचारियों ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए 8 मई को आजाद मैदान में सामूहिक मुंडन आंदोलन करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है, यदि हमारी सेवाओं को न्याय नहीं मिला, तो यह हमारा अंतिम कदम होगा।
दो दशक से हाे रही अनदेखी
वर्ष 2001 से शुरू हुए समग्र शिक्षा अभियान के तहत विषय विशेषज्ञ, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लेखा कर्मी, एमआईएस कोऑर्डिनेटर, इंजीनियर, जिला समन्वयक और सहायक कार्यक्रम अधिकारी जैसे कई पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति अस्थायी अनुबंध और मानदेय के आधार पर की गई थी, लेकिन 2 दशकों की सेवा के बाद भी उन्हें स्थायी दर्जा नहीं मिल पाया है।
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257 कर्मचारियों की सेवा काल में मृत्यु
इस लंबे संघर्ष के दौरान 257 कर्मचारियों की सेवा काल में मृत्यु हो चुकी है, जबकि कई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए। इसके बावजूद सकारात्मक निर्णय के आश्वासन पर ही कर्मचारी अब तक टिके हुए हैं। आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने खून से पत्र लिखना, सड़क जाम, पेड़ों पर चढ़ना, थाली बजाना, पुरुष कर्मचारियों का मुंडन जैसे कई तरीकों से सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। कई सांसद एवं विधायक आंदोलन स्थल पर पहुंचे, लेकिन महाराष्ट्र सरकार का कोई भी मंत्री वहां नहीं आया, इस पर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जताई है।
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पक्ष-विपक्ष दोनों स्तरों पर मिला मात्र आश्वासन
विपक्ष में रहते हुए कई नेताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया था और सत्ता में आने पर कर्मचारियों को स्थायी करने का वादा किया था। लेकिन आज तक वह वादा पूरा नहीं हुआ है। अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि लाडले भाई-बहन मानकर कम से कम शेष 3,378 कर्मचारियों को स्थायी सेवा का न्याय मिलेगा। महिला कर्मचारियों के मुंडन आंदोलन के ऐलान से यह मुद्दा और गंभीर हो गया है एवं आने वाले दिनों में सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
