हमले से डरे डॉक्टर ने दिया इस्तीफा, हमेशा के लिए छोड़ा शहर, डोंबिवली मारपीट मामले में नया मोड़
Dombivli Doctor Attack Case: डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट मामले में नया मोड़ आया है। हमले से डरे पीड़ित डॉक्टर ने पद से इस्तीफा देकर हमेशा के लिए शहर छोड़ दिया है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
डॉक्टरों से मारपीट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dombivli Doctor Resigns: महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई बर्बरता का मामला अब एक बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गया है। हमले का शिकार हुए एक डॉक्टर ने न केवल अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, बल्कि जान का खतरा बताते हुए हमेशा के लिए शहर छोड़ने का फैसला किया है। यह घटना केवल एक स्वास्थ्यकर्मी के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
इस्तीफा देने वाले डॉक्टर ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि अस्पताल परिसर और शहर में अब बहुत डर का माहौल है। उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया कि गुंडे हम पर नजर रखे हुए हैं और ऐसी स्थिति में काम करना उनके लिए नामुमकिन है। डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने सुरक्षा कारणों से शहर छोड़ दिया है और वे अब कभी वापस लौटकर ठाणे या डोंबिवली में काम नहीं करेंगे। उनके शब्दों में एक गहरी हताशा थी जब उन्होंने कहा, दूसरे डॉक्टर वहां काम कर सकते हैं, लेकिन मैं नहीं कर सकता।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 6 जुलाई को डोंबिवली के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल में शुरू हुआ था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एनआईसीयू में सभी बेड भरे हुए थे। जब एक नवजात को वहां लाया गया, तो दो डॉक्टरों ने बच्चे के बेहतर इलाज के लिए परिजनों को किसी दूसरे बहतर अस्पताल ले जाने की नेक सलाह दी।
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लेकिन यह सलाह परिजनों को नागवार गुजरी और उन्होंने स्थानीय रसूखदार नेताओं को बुला लिया। इसके बाद जो हुआ, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में कथित तौर पर शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे एक डॉक्टर को थप्पड़ और घूंसे मारते हुए और उनके सिर पर रजिस्टर से वार करते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, एक महिला डॉक्टर के साथ भी हाथापाई की गई और उनका मोबाइल छीनकर फेंक दिया गया।
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राजनीतिक और सामाजिक उबाल
इस घटना के बाद पुलिस ने रमेश म्हात्रे और उनके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, शिवसेना शिंदे गुट ने अपने पार्षद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन डॉक्टरों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। महाराष्ट्र स्टेट एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने गिरफ्तारी का स्वागत तो किया है, लेकिन उनका कहना है कि केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है। डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर संगठन ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा है।
यह मामला अब केवल मारपीट का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के भविष्य का बन गया है। जब जान बचाने वाले डॉक्टर खुद अपनी जान बचाने के लिए शहर छोड़ने पर मजबूर हो जाएं, तो यह समाज और सरकार दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
