पार्टी मर्ज करनी थी तो होटल में मिलते... शरद पवार और सीएम शिंदे की मुलाकात पर ये क्या कह गए पृथ्वीराज चव्हाण

Prithviraj Chavan Statement: शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात पर पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बड़ा तंज कसा है। चव्हाण ने कहा कि शिवसेना ठाकरे गुट को इस मुलाकात से गहरी ठेस लगी है।
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एकनाथ शिंदे और शरद पवार की मुलाकात (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sharad Pawar Eknath Shinde Meeting: एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हुई हालिया मुलाकात ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने पार्टी मर्ज और होटल वाली टिप्पणी कर सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

पृथ्वीराज चव्हाण ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें इस मुलाकात को किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर या पार्टी विलय से जोड़कर देखा जा रहा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर मंशा पार्टी का विलय करने की होती, तो यह मुलाकात सार्वजनिक रूप से सबके सामने नहीं होती। उनके शब्दों में, अगर आपको पार्टी मर्ज करनी है तो कोई जरूरी है कि खुलेआम मिलकर करें? आप चुपचाप होटल में मुलाकात कर सकते हैं। चव्हाण का मानना है कि इस तरह की मुलाकातों को इतनी छोटी नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

संजय राउत और शिवसेना UBT की नाराजगी पर रुख

हालांकि चव्हाण ने शरद पवार के मिलने के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने महाविकास अघाड़ी के सहयोगी दल शिवसेना ठाकरे गुट की भावनाओं को भी जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि शरद पवार एक बहुत बड़े और वरिष्ठ नेता हैं और उनके उपमुख्यमंत्री से मिलने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कोई सलाह देना या किसी सार्वजनिक मुद्दे पर चर्चा करना।

मगर, उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिवसेना ठाकरे गुट को इस मुलाकात से गहरी ठेस लगी है और यह स्वाभाविक है। चव्हाण ने स्पष्ट किया, जिस व्यक्ति ने शिवसेना को तहस-नहस कर दिया था, उसे आप सम्मान दोगे और जाकर मिलोगे, तो उन्हें ठेस तो लगेगी ही। उन्होंने कहा कि वे संजय राउत के गुस्से और उनके बयानों के पीछे के कारण को अच्छी तरह समझ सकते हैं।

पुराने दौर और वाजपेयी सरकार का हवाला

राजनीति में गिरते संवाद के स्तर पर टिप्पणी करते हुए चव्हाण ने कहा कि विधानसभा या संसद में हम वैचारिक रूप से एक-दूसरे के विरोधी होते हैं, दुश्मन नहीं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय के अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उस दौर में अलग-अलग पार्टी के नेताओं का आपस में मिलना कोई गैर बात नहीं मानी जाती थी। सदन के भीतर कड़ा प्रहार करने के बावजूद बाहर नेता एक-दूसरे से सौहार्दपूर्ण संबंध रखते थे, जो वातावरण आज बदल गया है।

भविष्य की अटकलें और स्पष्टता

अंत में, पृथ्वीराज चव्हाण ने साफ किया कि शरद पवार और शिंदे के बीच असल में क्या बात हुई, इस पर अटकलें लगाना उनके लिए सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह एनसीपी की जिम्मेदारी है कि वे स्पष्ट करें कि मुलाकात का मुख्य उद्देश्य क्या था। चव्हाण ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीतिक गलियारों में कुछ गड़बड़ी की खबरें जरूर तैर रही हैं, लेकिन उनके पास इस बारे में कोई फर्स्ट हैंड या आधिकारिक जानकारी नहीं है।

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