अभी अंत नहीं हुआ है… धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सुप्रिया सुले का बड़ा बयान, रखी ये बड़ी मांग
Supriya Sule Statement: NEET पेपर लीक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे केवल शुरुआत बताते हुए संसद में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सुपिया सुले और धर्मेंद्र प्रधान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dharmendra Pradhan Resignation Supriya Sule Reaction: नीट पेपर लीक मामले में देश की युवाशक्ति की एक बड़ी जीत हुई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 28 दिनों तक चली छात्रों की जिद और कड़े संघर्ष ने आखिरकार केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न केवल छात्रों के अटूट संकल्प की जीत है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ खड़ी हुई CJP की भी एक बड़ी नैतिक जीत है। दमनकारी नीतियों के खिलाफ बिना डरे खड़े रहने वाले युवाओं ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में असली ताकत जनता के पास है। यह संघर्ष केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की एक बड़ी मांग का आगाज था।
NEET-UG परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले में मचे भारी बवाल के बीच आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे को देश के युवाओं, प्रदर्शनकारी छात्रों और विपक्षी दलों की एक बहुत बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट की वरिष्ठ सांसद सुप्रिया सुले ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और असली जवाबदेही का समय अब शुरू हुआ है।
यह केवल शुरुआत है
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल छात्रों, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और विपक्ष के निरंतर दबाव के कारण संभव हुआ है। उन्होंने आंदोलन में शामिल हर छात्र और प्रदर्शनकारी को बधाई दी जो तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी मांग पर डटे रहे।
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लेकिन सुले ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह अंत नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की है कि महज एक इस्तीफे से छात्रों के साथ हुए अन्याय की भरपाई नहीं होगी। उन्होंने सरकार से वास्तविक जवाबदेही, शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और संसद के भीतर नीट मुद्दे पर एक विस्तृत और पारदर्शी चर्चा की पुरजोर मांग की है। उनका मानना है कि जब तक पूरी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं है।
शरद पवार का युवाओं को सलाम
वहीं, दिग्गज नेता शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। पवार ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं ने लगातार 28 दिनों तक जो अटूट संघर्ष किया और अपनी जिद्द दिखाई, वह वाकई में सराहनीय है। उनके अनुसार, यह लड़ाकू तेवर लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है, जिसने सरकार को बिना डरे अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।
शरद पवार ने इस जीत का पूरा श्रेय देश की युवा पीढ़ी को देते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज देश के लोकतंत्र ने नया रूप लिया है और इसका पूरा श्रेय हमारे युवाओं को जाता है। पवार ने उन सभी विपक्षी सांसदों का भी दिल से आभार व्यक्त किया जिन्होंने संसद से सड़क तक युवाओं को नैतिक और राजनीतिक समर्थन प्रदान किया।
The resignation of Education Minister Dharmendra Pradhan comes only after sustained pressure from peaceful protesters, students, and the Opposition. I congratulate every protester who stood firm on the #NEETUG issue. But this cannot be the end, we demand real accountability,… — Supriya Sule (@supriya_sule) July 25, 2026
युवाशक्ति की एकजुटता का बड़ा विजय
यह इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि जब देश की युवाशक्ति एकजुट होकर दमनकारी नीतियों के खिलाफ खड़ी होती है, तो सत्ता को झुकना ही पड़ता है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भविष्य की शिक्षा नीति और सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
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सुप्रिया सुले और शरद पवार के बयानों से यह साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर घमासान और तेज होगा। विपक्ष अब केवल इस्तीफे से संतुष्ट नहीं है। उनकी नजर अब उन ठोस सुधारों पर है जो देश के लाखों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित कर सकें। यह स्पष्ट संदेश है कि सरकार के लिए मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं।
