मनोज जरांगे की बड़ी जीत, मराठा आरक्षण आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को 10-10 लाख देगी फडणवीस सरकार
Maratha Reservation Manoj Jarange Devendra Fadnavis: मराठा आंदोलन के मृतकों के वारिसों को 10-10 लाख रुपये देगी फडणवीस सरकार। मनोज जरांगे की बड़ी मांग पूरी, 34 परिवारों को तत्काल मदद।
- Written By: अनिल सिंह
देवेंद्र फडणवीस ने पूरा किया वादा, मराठा आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवार को मदद का ऐलान (डिजाइन फोटो)
Devendra Fadnavis Fund For Maratha Dead Activists: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा पिछले कई महीनों से लगातार गर्माया हुआ है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपने आमरण अनशन के दौरान मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार के सामने कई कड़े नियम और शर्तें रखी थीं। इनमें से एक सबसे भावुक और प्रमुख मांग यह थी कि आरक्षण आंदोलन के दौरान जिन भी मराठा कार्यकर्ताओं की असमय मृत्यु हुई है, उनके बेसहारा परिवारों को सरकार तुरंत मुआवजा दे। इस संबंध में उपसमिति के अध्यक्ष डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की थी। इसी बैठक के सकारात्मक नतीजों के बाद सरकार ने फंड जारी करने का शासनादेश जारी कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आंदोलन में मारे गए अधिकांश परिवारों को पहले ही सहायता दी जा चुकी थी, लेकिन 34 परिवार ऐसे थे जिन्हें तकनीकी कारणों से अभी तक कोई वित्तीय राहत नहीं मिल सकी थी।
आठ प्रभावित जिलों के पीड़ितों को मिलेगी सीधे बैंक खाते में मदद
राज्य सरकार द्वारा पिछले दो दिनों के भीतर की गई इस त्वरित कार्रवाई के बाद इन 34 मृतक व्यक्तियों के कानूनी वारिसों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। उपसमिति के अध्यक्ष डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटिल ने इस राहत राशि का जिलावार ब्योरा साझा करते हुए बताया कि इनमें सबसे ज्यादा बीड जिले के 15 वारिस शामिल हैं। इसके अलावा धराशिव के 5, परभणी के 4, हिंगोली के 4, नांदेड़ के 3, जालना के 1, लातूर के 1 और छत्रपति संभाजीनगर के 1 पीड़ित परिवार को इस राहत पैकेज के अंतर्गत कवर किया गया है। पाटिल ने दावा किया कि सरकार आंदोलनकारियों से किए गए अपने हर एक वादे को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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उपसमिति की बैठक में मराठा समुदाय की मांगों पर सकारात्मक रुख
डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि मराठा आरक्षण को लेकर गठित की गई कैबिनेट उपसमिति की बैठकों में केवल मुआवजे पर ही नहीं, बल्कि समुदाय की अन्य सभी लंबित कानूनी और सामाजिक मांगों पर भी बेहद सकारात्मक और विस्तार से चर्चा की गई है। सरकार आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने और सगे-संबंधियों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रियाओं पर भी तेजी से कानूनी रास्ता तलाश रही है ताकि इस संवेदनशील सामाजिक विवाद को हमेशा के लिए पूरी तरह सुलझाया जा सके।
‘मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध’
मनोज जरांगे पाटिल द्वारा अपना आमरण अनशन आधिकारिक तौर पर वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया के सामने अपनी पहली महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया साझा की है। मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि सरकार ने मनोज जरांगे पाटिल को जो भी आश्वासन दिए थे, वे सभी खुलेआम मीडिया के कैमरों के सामने दिए गए थे और उनमें से किसी भी वादे को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। खुद मनोज जरांगे ने भी अनशन तोड़ने से पहले सरकार द्वारा भेजे गए लिखित आश्वासनों को मंच से पढ़कर सुनाया था। फडणवीस ने अंत में दोहराया कि उनकी सरकार मराठा समाज के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है और उन्हें हर हाल में न्याय दिलाकर रहेगी।
