कपास उत्पादकता मिशन (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: साल 2025-26 के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार कपास उगाने वाले लाखों किसानों के हित में कपास उत्पादकता मिशन शुरू कर रही है। वह मिशन पांच साल तक चलेगा।
इसका उद्देश्य कपास की खेती की उत्पादकता बढ़ाना, खेती को टिकाऊ बनाना और एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कपास की किस्मों को बढ़ावा देना है। किसानों को विज्ञान और तकनीक से जुड़ी बेहतर मदद दी जाएगी, सीतारमण ने कहा था कि यह मिशन वस्त्र क्षेत्र के एफ विजन यानी खेत से फैशन तक की सोच के अनुरूप है।
इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश के पारंपरिक वस्त्र उद्योग के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी। उनकी इस घोषणा को उस समय काफी तवज्जो भी दी गई थी, क्योंकि पिछले कई सालों से कपास किसान लगातार बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
लेकिन पूरे एक साल बाद यानी 1 फरवरी 2026 को जब निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण दिया तो इस योजना का जिक्र भी नहीं किया। जबकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के बजट में पिछले साल घोषित कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था।
वित्त मंत्रालय की बजट घोषणाओं का कार्यान्वयन (2025-2026) डॉक्यूमेंट में इस मिशन का जिक्र है, जो बताता है कि कपास उत्पादकता मिशन से जुड़ा व्यय वित समिति (ईएफसी) का प्रस्ताव 27 मई 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कपास पर टेक्सटाइल एडवाइजरी ग्रुप की 10वीं इंटरैक्टिव बैठक में प्रस्तुत किया गया था।
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इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग एवं वस्त्र मंत्रालय ने संयुक्त रूप से तैयार किया गया कपास उत्पादकता मिशन का कॉन्सेप्ट नोट साझा किया। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, वस्त्र, पर्यावरण, जैव प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सचिवों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें कपास उत्पादकता मिशन से जुड़े ईएफसी प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इन बैठकों और चर्चाओं से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर मिशन का कॉन्सेप्ट नोट तैयार किया गया है और ईएफसी का प्रारूप अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए अंतिम रूप दिया जा रहा है।