कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की कुर्सी खतरे में! आलाकमान ने दिया 6 माह का अल्टीमेटम
Maharashtra Congress Crisis: महाराष्ट्र कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर अंदरूनी कलह गहरा गई है। दिल्ली में शिकायत के बाद प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की कुर्सी खतरे में आ गई है।
- Written By: आकाश मसने
हर्षवर्धन सपकाल व राहुल गांधी (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Congress State President Harshwardhan Sapkal News: महाराष्ट्र कांग्रेस की अंतर्कलह एक बार फिर सामने आ गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी। इन नियुक्तियों को लेकर राज्य के कुछ कांग्रेस नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष सपकाल के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा लेकर दिल्ली दरबार का रुख किया। इस पर कांग्रेस आलाकमान ने संज्ञान लिया है। इससे प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की कुर्सी खतरे में आ गई है।
महाराष्ट्र कांग्रेस में अंतर्कलह?
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कुछ दिन पहले राज्य के जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी साफ दिख तौर पर सामने आ गई है। कुछ नेताओं ने इसकी शिकायत कर पार्टी आलाकमान से कर दी है। हालांकि पार्टी ने फैसला लिया है कि तत्काल किसी भी जिलाध्यक्ष को नहीं बदला जाएगा। नए नियुक्त जिलाध्यक्षों को 6 महीने का समय दिया गया है। इसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
हर्षवर्धन सपकाल काे भी मिला अल्टीमेटम
इधर पार्टी आलाकमान ने प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को भी सख्त संदेश दिया है। पार्टी की ओर से यह संदेश भी दिया है कि आपका काम अच्छा चल रहा है, लेकिन राज्य संगठन प्रमुख के रूप में सभी नेताओं को साथ लेकर चलें।
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इस संदेश के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गई। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी खतरें में है। 6 माह बाद स्थिति की समीक्षा के दौरान यदि हर्षवर्धन सपकाल के काम को लेकर निगेटिव फीडबैक आता है तो उनके हाथ से महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी जा सकती है।
कांग्रेस ने शुरू किया सृजन संगठन अभियान
देशभर में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के लिए कांग्रेस ने ‘सृजन संगठन अभियान’ चलाया था। इस अभियान के तहत देश के विभिन्न हिस्सों से कांग्रेस नेताओं को पर्यवेक्षक के रूप में महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में भेजा गया था।
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विदर्भ में नाराज नेताओं की संख्या अधिक
सूत्रों के अनुसार, विदर्भ के कुछ सांसदों और विधायकों ने भी पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी तथा अपने क्षेत्र के नेताओं की नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मांग की कि जिन जिलाध्यक्षों को लेकर असंतोष है, उन्हें तत्काल बदला जाए। सांसदों और विधायकों द्वारा व्यक्त की गई इस नाराजगी का कांग्रेस नेतृत्व ने संज्ञान लिया है।
इसके अनुसार प्रदेशाध्यक्ष को कुछ आवश्यक सुझाव भी दिए गए हैं। हालांकि, जिन नेताओं को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, उन्हें कम से कम 6 महीने काम करने का अवसर दिया जाएगा। फिलहाल किसी को भी नहीं बदला जाएगा। उनके 6 महीने के कार्यकाल की समीक्षा के बाद ही यह तय किया जाएगा कि उन्हें पद पर बनाए रखा जाए या बदला जाए।
