मोर्चे से दूरी लेकिन हिंदी का विरोध, कांग्रेस का रास्ता अलग: हर्षवर्धन सपकाल
सपकाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस राज ठाकरे के 5 जुलाई के मोर्चे का समर्थन तो करती है, लेकिन उसमें शामिल नहीं होगी। कांग्रेस का रास्ता अलग है।
- Written By: आंचल लोखंडे
कांग्रेस का रास्ता अलग: सपकाल (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: महाराष्ट्र में स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस निर्णय को भाषाई जबरदस्ती करार देते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार की “एक भाषा, एक संस्कृति” की खतरनाक सोच का हिस्सा है।
सपकाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस राज ठाकरे के 5 जुलाई के मोर्चे का समर्थन तो करती है, लेकिन उसमें शामिल नहीं होगी।”कांग्रेस का रास्ता अलग है। हम मोर्चे से दूर रहेंगे, लेकिन सरकार को चेतावनी देते हैं। हिंदी थोपने की कोशिशें बंद करो,” ऐसा सपकाल ने दो टूक कहा।
हिंदी को थोपने की साजिश
सपकाल ने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ परिवार देश की भाषाई विविधता को नष्ट कर, हिंदी को थोपने की साजिश रच रहे हैं। “हिंदी का अपमान नहीं होना चाहिए, लेकिन उसकी जबरदस्ती किसी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।”
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गुजरात में हिंदी को अनिवार्य नहीं
सपकाल ने यह भी सवाल उठाया कि जब गुजरात जैसे राज्यों में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया, तो महाराष्ट्र पर यह दबाव क्यों डाला जा रहा है? उन्होंने इसे दोहरे मापदंड और राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया। कांग्रेस अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर जनआंदोलन छेड़ेगी।”
जनआंदोलन छेड़ेगी कांग्रेस
हर्षवर्धन सपकाल ने एक ओर जहाँ हिंदी की जबरदस्ती का कड़ा विरोध किया, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस किसी अन्य दल के आंदोलन में शामिल नहीं होगी, बल्कि अपने तरीके से लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।
