Mumbai में ‘सुविधा केंद्र’ मॉडल सफल, CM फडणवीस बोले – शहरी महाराष्ट्र का आदर्श
Mumbai के ‘सुविधा केंद्र’ मॉडल ने झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता और स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव लाया है। CM फडणवीस ने इसे शहरी महाराष्ट्र का आदर्श मॉडल बताते हुए और केंद्र खोलने के निर्देश दिए।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
CM Devendra Fadnavis On Suvidha Kendra: मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में स्वच्छता और स्वास्थ्य क्रांति लाने वाली ‘सुविधा केंद्र’ पहल ने शहर की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों की तस्वीर बदल दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पथ प्रदर्शक योजना की सफलता को रेखांकित करते हुए इसकी सराहना की है और इसे पूरे शहरी महाराष्ट्र के लिए एक आदर्श मॉडल घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पहल न केवल शहरी स्वच्छता सुनिश्चित कर रही है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक नया मानक स्थापित कर रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस की संकल्पना से शुरू हुआ ‘स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान’ इस ‘सुविधा केंद्र’ मॉडल के दम पर मुंबई में तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। यह पहल बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) की संयुक्त साझेदारी का परिणाम है, जिसने कम समय में ही उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई जैसे विशाल आबादी वाले महानगर में जहां स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं एक बड़ी चुनौती होती हैं, वहां ‘सुविधा केंद्र’ मॉडल ने दिखा दिया है कि साझेदारी से उत्कृष्ट कार्य किया जा सकता है। यह केंद्र शहर की स्वास्थ्य सुरक्षा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर मॉडल
‘सुविधा केंद्र’ मॉडल की सफलता दो प्रमुख स्तभों पर टिकी है। पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक आत्मनिर्भरता। इन केंद्रों में जल-बचत तकनीक, ऊर्जा दक्षता और कुशल अपशिष्ट प्रबंधन को अपनाया गया है।
यह डिजाइन इन्हें पर्यावरण अनुकूल बनाता है और पर्यावरणीय स्थिरता का एक उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करता है। यह मॉडल केवल अनुदान पर निर्भर नहीं है। यह योजना इस तरह डिजाइन की गई है कि केंद्र अपनी शुरुआत के 9 महीनों के भीतर ही अपना संचालन खर्च खुद वहन करना शुरू कर देते हैं।
मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि आज मुंबई के सभी 23 केंद्र पूरी तरह से स्वयं-टिकाऊ है। यह वित्तीय सफलता इस मॉडल को शहरी महाराष्ट्र के लिए आदर्शवत और अनुकृति योग्य बनाती है। सुविधा केंद्रों को सुरक्षित और सम्मानजनक स्वच्छता प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इनमें विशेष रूप से ध्यान रखा गया है।
‘वर्तमान स्थिति और भविष्य का विस्तार’
मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस योजना से तेजी से विस्तार हो रहा है। यह मुंबई की वंचित बस्तियों में स्वच्छता सुविधाओं की आवश्यकता को दशांती है। वर्तमान में मुंबई में 23 केंद्र पूरी तरह से कार्यरत हैं। 24 वां केंद्र शीघ्र ही शुरू होने वाला है।
2 अतिरिक्त केंद्र निर्माणाधीन हैं और 7 केंद्रों के प्रस्ताव प्रगति के पथ पर हैं। इसमें बीएमसी और एचयूएल के साथ अब एचएसबीसी और जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन (जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन) जैसी संस्थाएं भी जुड़ गई हैं।
इनके सहयोगों से यह योजना अगले कुछ वर्षों में मुंबई महानगर क्षेत्र में और अधिक व्यापक स्वरूप ले लेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने मुंबई महानगर क्षेत्र में इस तरह के और सुविधा केंद्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि ये केंद्र स्वच्छता की स्थायी व्यवस्था के महत्वपूर्ण घटक सिद्ध हुए हैं।
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जन-केंद्रित और स्वास्थ्यवर्धक परिणाम
- सीएम देवेंद्र ने कहा कि ‘सुविधा केंद्र’ सिर्फ ईंट और मोटोर से बनी संरचनाएं नहीं है, वे सामुदायिक स्वास्थ्य और सम्मान का प्रतीक बन गए है। अब तक 5.5 लाख नागरिकों ने इन केंद्रों की सुरक्षित, स्वच्छ और बहनीय (किफायती) सुविधाओं का सीधा लाभलिया है।
- समुदाय की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस पहल की एक अनूठी विशेषता है। 300 प्रशिक्षित महिलाओं ने एक मजबूत व्यवहार परिवर्तन अभियान चलाया, अभियान से 7।5 लाख नागरिकों को स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता की शिक्षा मिली, जिससे उनकी आदतों और स्वास्थ्य जागरूकता में सकारात्मक बदलाव आया, इस मॉडल का सबसे प्रभावशाली परिणाम स्वास्थ्य के मोर्वे पर सामने आया है। दुषित पानी और गंदगी से होने वाली बीमारियों के खिलाफ यह एक प्रभावी दाल साबित हुआ है।
- सुविधा केंद्री के उपयोग के कारण, जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) संबंधी बीमारियां, अतिसार (डायरिया) और मूत्रमार्ग के संक्रमण के मामली में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है।
- सीएम ने इस सुधार को रेखांकित करते हुए कहा कि झुग्गी बस्तियों में सर्वाधिक समस्या दूषित पानी और अस्वच्छता से होने वाले रोगों की थी, जो अब लक्षणीयरित्या कम हो गई है। यह शहरों के स्वास्थ्य सूचकांक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
