राहुल गांधी के विदेश दौरों पर ₹60 करोड़ का खर्च? घोषित आय सिर्फ 11 करोड़, चित्रा वाघ ने पूछे 2 कानूनी सवाल
Rahul Gandhi FCRA Violation: राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर बीजेपी नेता चित्रा वाघ ने तीखे सवाल उठाए हैं। 22 वर्षों में 54 दौरों पर ₹60 करोड़ के अनुमानित खर्च व ₹11 करोड़ की घोषित आय पर सवाल उठाए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
राहुल गांधी व चित्रा वाघ (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Chitra Wagh Slam Rahul Gandhi: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। बीजेपी की वरिष्ठ नेता चित्रा वाघ और बीजेपी मुंबई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से राहुल गांधी के दौरों और उस पर हुए खर्च को लेकर बेहद गंभीर और तीखे सवाल उठाए गए हैं। बीजेपी ने एक इन्फोग्राफिक शेयर करते हुए सीधा हमला बोला है और पूछा है कि दौरे सार्वजनिक… लेकिन फंड का हिसाब कहां है?
खर्च और कमाई में 5 गुना का अंतर
बीजेपी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों (2004 से 2026) के दौरान बड़े पैमाने पर विदेश यात्राएं की हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार
- कुल विदेश दौरे: पिछले 22 साल में राहुल गांधी ने कुल 54 विदेश यात्राएं की हैं।
- भ्रमण किए गए देश: उन्होंने यूरोप, अमेरिका और एशिया के करीब 11 अलग अलग देशों का दौरा किया।
- अनुमानित कुल खर्च: बीजेपी का दावा है कि इन सभी दौरों पर लगभग ₹60 करोड़ का भारी भरकम खर्च हुआ है।
- घोषित आय: असेसमेंट ईयर 2013-2023 के अनुसार, राहुल गांधी की घोषित आय केवल ₹11 करोड़ है।
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के विदेश दौरों का खर्च उनकी घोषित आय की तुलना में 5 गुना से भी अधिक है। उदाहरण के तौर पर पोस्ट में कहा गया है कि अकेले साल 2015 में उनके दक्षिण-पूर्व एशिया दौरे का अनुमानित खर्च ₹4.5 करोड़ था, जो उस वर्ष उनकी घोषित आय से 5 गुना ज्यादा था।
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चित्रा वाघ ने उठाए 2 गंभीर कानूनी सवाल
इस पूरे अंतर को लेकर बीजेपी और चित्रा वाघ ने राहुल गांधी के सामने दो कानूनी संभावनाएं रखते हुए स्पष्टीकरण मांगा है, क्या यह FCRA का उल्लंघन है? बीजेपी का कहना है कि अगर राहुल गांधी की इन विदेश यात्राओं का खर्च किसी विदेशी संस्था, संगठन या विदेशी नागरिकों ने उठाया है, तो विदेशी अंशदान (नियमन) अधिनियम, 2010 (FCRA) के तहत बिना पूर्व अनुमति के ऐसा फंड लेना पूरी तरह से गैरकानूनी है। सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी किसी अनुमति की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राहुल गांधींचे ५४ परदेश दौरे…
आणि खर्च तब्बल ₹६० कोटींचा? ✈️ पण अधिकृत उत्पन्न फक्त ₹११ कोटी!
मग उरलेले पैसे आले कुठून, राहुल गांधीजी? 🤔 जर हा खर्च परदेशातून झाला असेल तर FCRA मंजुरी कुठे आहे?
आणि स्वतःच्या पैशातून झाला असेल तर आयकर विवरणात हिशोब का दिसत नाही? सामान्य… pic.twitter.com/tQJ8ZRtDkk — Chitra Kishor Wagh (@ChitraKWagh) May 14, 2026
क्या ITR में जानकारी छिपाई गई?
दूसरी संभावना यह है कि अगर यह पूरा ₹60 करोड़ का खर्च राहुल गांधी ने खुद अपनी जेब से किया है, तो यह उनके द्वारा दाखिल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और चुनावी हलफनामे में दर्ज होना अनिवार्य था। लेकिन सार्वजनिक डोमेन में ऐसा कोई विवरण दिखाई नहीं देता।
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आम नागरिक से हिसाब, तो राहुल गांधी को छूट क्यों?
बीजेपी ने इस मुद्दे को आम जनता के नियमों से जोड़ते हुए कांग्रेस को घेरा है। चित्रा वाघ और बीजेपी नेताओं का कहना है कि देश के एक आम नागरिक को अपने छोटे से छोटे लेन देन और कमाई का हिसाब सरकार को देना पड़ता है। बैंकों और इनकम टैक्स के कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में देश के इतने बड़े राजनीतिक दल के नेता से ₹60 करोड़ का हिसाब क्यों नहीं मांगा जाना चाहिए?
बीजेपी ने अंत में सवाल किया है कि जहां कानूनन रिकॉर्ड होना अनिवार्य है, वहां रिकॉर्ड का न होना ही अपने आप में कई बड़े संशय पैदा करता है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी के इस कड़े हमले पर कांग्रेस और राहुल गांधी की तरफ से क्या पलटवार आता है।
