भतीजे के चक्कर में छिनी भुजबल की राज्यसभा सीट? सुप्रिया सुले की सहानुभूति के बाद अब घर वापसी की अटकलें तेज
Chhagan Bhujbal Statement: राज्यसभा का टिकट न मिलने पर एनसीपी नेता छगन भुजबल का बड़ा बयान। सुप्रिया सुले की तारीफ के बाद क्या भुजबल करेंगे शरद पवार गुट में घर वापसी? जानें सियासी मायने।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सुप्रिया सुले और छगन भुजबल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhagan Bhujbal Rajya Sabha Ticket Issue: महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल के बीच अब एक नया सियासी ड्रामा शुरू हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने राज्यसभा का टिकट न मिलने पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर नाराजगी से इनकार किया है, लेकिन उनके बयानों में छिपी कड़वाहट साफ झलक रही है। अपने भतीजे समीर भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल करवाने की इच्छा ही छगन भुजबल की राज्यसभा सांसद की कुर्सी छीन ले गई, ऐसी चर्चा ने अब जोर पकड़ लिया है।
भतीजे के लिए भी मांगा था न्याय
भुजबल ने खुलासा किया कि वे राज्यसभा जाने के इच्छुक थे, लेकिन उन्होंने इसके साथ एक बड़ी शर्त रखी थी। उन्होंने कहा कि जैसे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र, सुनील तटकरे की बेटी और सुनेत्रा पवार के परिवार में भी पद हैं, वैसे ही वे भी चाहते थे कि उनके जाने के बाद उनके भतीजे समीर भुजबल को मंत्री पद दिया जाए। भुजबल के अनुसार, उन्होंने मांग की थी कि जो न्याय अन्य नेताओं को मिला है, वही उनके साथ भी होना चाहिए। हालांकि, बीजेपी की ओर से संदेश आया कि इस पर कैबिनेट विस्तार या फेरबदल के समय विचार किया जाएगा।
मैं कबड्डी का खिलाड़ी हूं, शतरंज का खिलाड़ी नहीं
राज्यसभा के लिए राजेंद्र जैन के नाम की घोषणा होने के बाद छगन भुजबल ने एक दिलचस्प मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा, मैं कबड्डी का खिलाड़ी हूं, शतरंज का खिलाड़ी नहीं। मुझे शतरंज नहीं आता। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों… यह राजनीति में उतारचढ़ाव चलता रहता है।
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सुप्रिया सुले की बढ़ती सहानुभूति और घर वापसी की अटकलें
इस पूरे विवाद के बीच शरद पवार गुट की नेता सुप्रिया सुले ने भुजबल के प्रति नरम रुख अपनाकर सबको चौंका दिया है। सुले ने कहा कि छगन भुजबल एक अनुभवी नेता हैं और अगर वे राज्यसभा जाते, तो देश को उनके संसदीय कौशल और नेतृत्व का लाभ मिलता। उन्होंने यहाँ तक कहा कि भुजबल का कद महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए और उनके बोलने का तरीका संसद में प्रभावशाली होता।
