भायखला जेल के 800 कैदियों के निवाले पर संकट, LPG की कमी के बाद प्रशासन ने शुरू किया ‘प्लान-B’
Byculla Jail LPG Crisis: वैश्विक गैस संकट के कारण मुंबई की भायखला जेल में एलपीजी की कमी। 800 कैदियों के लिए अब लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की तैयारी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
- Written By: अनिल सिंह
Byculla Prison Food Management LPG Crisis (फोटो क्रेडिट-X)
तारिक़ खान @नवभारत
Byculla Prison Food Management: ईरान-इजरायल संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन में आए व्यवधान का असर अब मुंबई की जेलों की रसोई तक पहुँच गया है। मुंबई के भायखला जिला कारागृह में एलपीजी (LPG) गैस की किल्लत के कारण 800 से अधिक कैदियों के भोजन पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि, जेल प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लकड़ियों के चूल्हों को फिर से जीवित करने की तैयारी शुरू कर दी है। मध्य पूर्व में तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली गैस आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा प्रभाव अब संस्थागत रसोइयों पर दिख रहा है।
भायखला जेल की क्षमता वैसे तो 462 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहाँ करीब 550 महिला और 350 पुरुष सहित कुल 900 के करीब कैदी बंद हैं। इतने बड़े समूह के लिए दिन में दो बार भोजन, नाश्ता और चाय तैयार करने के लिए प्रतिदिन 7 से 8 गैस सिलेंडरों की खपत होती है।
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गैस की किल्लत और ‘लकड़ी के चूल्हे’ का विकल्प
जेल अधीक्षक अशोक कारकर के अनुसार, गैस संकट को देखते हुए जेल की पुरानी कैंटीन, जो पिछले एक साल से बंद थी, उसके रिनोवेशन का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। यदि गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप होती है, तो दाल-चावल पकाने के लिए लकड़ियों का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में लकड़ियों का स्टॉक भी जमा कर लिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैदियों को समय पर भोजन मिलता रहे, क्योंकि जेल के भीतर कैदियों के पास बाहर के लोगों की तरह होटल या स्ट्रीट फूड जैसे कोई वैकल्पिक साधन मौजूद नहीं हैं।
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आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में प्राथमिकता
महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी आपूर्ति में रक्षा, रेलवे, पुलिस और जेलों जैसी आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बावजूद, नागपुर मध्यवर्ती कारागृह जैसी जगहों से गैस की कमी की खबरें आने के बाद भायखला जेल प्रशासन ने पहले ही तीन दिन का गैस स्टॉक सुरक्षित कर लिया है। संबंधित गैस वितरक एजेंसियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार पत्राचार किया जा रहा है ताकि आपूर्ति की कड़ी न टूटे। जेल के भीतर प्रतिदिन 2 हजार से अधिक रोटियां सेंकी जाती हैं, जिसके लिए निरंतर ईंधन की आवश्यकता होती है।
कैदियों को मिलने वाला दैनिक राशन (प्रति व्यक्ति ग्राम में)
| खाद्य सामग्री | मात्रा (ग्राम/मिली) |
| दाल | 120 ग्राम |
| चावल | 150 ग्राम |
| चपाती | 300 ग्राम |
| सब्जी | 200 ग्राम |
| दूध | 150 मिलीलीटर |
कैदियों की मजबूरी और प्रशासनिक चुनौती
जेल के बाहर आम नागरिक गैस की कमी होने पर इंडक्शन चूल्हा, केरोसिन या बाहर से खाना मंगाने जैसे विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं, लेकिन जेल मैनुअल के अनुसार कैदी केवल जेल की रसोई में बना भोजन ही कर सकते हैं। उन्हें घर का बना या बाहर का खाना देने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में रसोई गैस का संकट लंबा खिंचने पर कानून-व्यवस्था और कैदियों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। फिलहाल जेल स्टाफ इस संकट से निपटने के लिए अतिरिक्त घंटों तक काम कर रहा है।
