महाराष्ट्र में गरबा आयोजन को लेकर राजनीति तेज, पहचान पत्र की अनिवार्यता और भ्रामक विज्ञापनों पर ऐतराज

Mumbai Garba Controversy: बोरीवली गरबा में गैर-हिन्दुओं के प्रवेश और रेंट ए पार्टनर पर विवाद गहराया। विधायक संजय उपाध्याय की मांग पर पहचान पत्र जांच अनिवार्य और पुलिस में शिकायत दर्ज।
Borivali Garba Controversy: ID Card Check Mandatory
गरबा पार्टनर विवाद मुंबई, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Borivali Navratri Garba Entry Dispute: उपनगर बोरीवली में आगामी नवरात्रि महोत्सव को लेकर विवाद गर्माता जा रहा है। यहां आयोजित होने वाले गरबा महोत्सव में गैर-हिन्दुओं के प्रवेश को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।

स्थानीय भाजपा विधायक संजय उपाध्याय और पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने गरबा पंडालों में मुस्लिमों के प्रवेश पर कड़ा एतराज जताया है। आयोजकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गरबा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक पवित्र धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है।

इसलिए इसमें भाग लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सनातन धर्म में पूरी आस्था रखनी होगी और माथे पर तिलक लगाने व पूजा-अर्चना जैसी पारंपरिक मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।

आयोजकों का मानना है कि उत्सव की पवित्रता को बनाए रखने के लिए ऐसे नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस महोत्सव में गीता रबारी और फाल्गुनी पाठक प्रमुख आकर्षण होंगी।

पहचान पत्र की जांच हुई अनिवार्य महोत्सव की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पुख्ता करने और किसी भी प्रकार के बाहरी या अनुचित तत्वों को अंदर घुसने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। महोत्सव के प्रमुख आयोजक संतोष सिंह ने घोषणा की है कि इस वर्ष कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों के लिए पहचान पत्र की जांच कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रवेश द्वार पर सुरक्षाकर्मियों और वालंटियर्स द्वारा गहन चेकिंग की जाएगी, ताकि बिना वैध पहचान के कोई भी व्यक्ति पंडाल के अंदर प्रवेश न कर सके। आयोजकों और स्थानीय प्रतिनिधियों का मानना है कि इस सख्त नियम से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सकेगा।

मुंबई के पुलिस आयुक्त को सौंपा गया पत्र

इन सब गतिविधियों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा और धोखाधड़ी की आशंका करार देते हुए, विधायक संजय उपाध्याय ने 21 सितंबर को मुंबई पुलिस आयुक्त और संबंधित पुलिस उपायुक्तों को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि 'रेंट ए गरबा पार्टनर' का झांसा देने वाले विज्ञापनदाताओं और संदिग्ध आयोजकों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से मामला दर्ज किया जाए।

उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि ऐसे लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि नवरात्रि के पावन अवसर पर किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि को पनपने न दिया जाए और मुंबई का माहौल पूरी तरह सुरक्षित, अनुशासित व शांतिपूर्ण बना रहे।

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1,000 से लेकर 6,500 रुपए में मिलेंगे गरबा के पार्टनर

एक तरफ जहां धार्मिक नियमों और पहचान पत्रों को लेकर चर्चा गर्म है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर फैल रही एक नई गतिविधि ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

इंटरनेट पर 'रेंट ए गरबा पार्टनर' के नाम से कई लुभावने विज्ञापन धडल्ले से चल रहे है। इन विज्ञापनों में 1,000 रुपए से लेकर 6,500 रुपए तक की राशि में गरबा खेलने के लिए पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।

इस प्रकार की व्यावसायिक और अनैतिक गतिविधियों पर गहरी आपत्ति जताई गई है। इस तरह के विज्ञापनों से सांस्कृतिक उत्सव की गरिमा धूमिल होती है और युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। आयोजकों व विज्ञापनदाताओं के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

संजय उपाध्याय, विधायक

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