एल्गार परिषद केस में नया मोड़! बॉम्बे हाईकोर्ट ने सागर गोरखे और रमेश गाइचोर को दी जमानत

Elgar Parishad Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में आरोपी सागर गोरखे और रमेश गाइचोर को जमानत दे दी है। कोर्ट ने अन्य सह-आरोपियों को मिली राहत और लंबी कैद को आधार बनाया।
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एल्गार परिषद केस के आरोपी सागर गोरखे और रमेश गाइचोर (सोर्स सोशल मीडिया)
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Sagar Gorkhe Ramesh Gaichor Bail: मुंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले के आरोपी सागर गोरखे और रमेश गाइचोर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। सितंबर 2020 से जेल में बंद इन कार्यकर्ताओं को अदालत ने 'समानता के सिद्धांत' (Parity) के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि मामले के कई अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अदालत ने गौर किया कि अपीलकर्ता पिछले चार वर्षों से तालोजा जेल में बंद हैं और निकट भविष्य में मुकदमा (Trial) शुरू होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है।

पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चूंकि इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे अन्य अभियुक्तों को लंबी कैद और सुनवाई में देरी के कारण राहत दी गई है, इसलिए सागर गोरखे और रमेश गाइचोर भी उसी समानता के आधार पर जमानत के हकदार हैं। कोर्ट ने दोनों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया।

जमानत की शर्तें और एनआईए की भूमिका

हालांकि अदालत ने उन्हें राहत दी है, लेकिन कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। रिहाई के बाद दोनों कार्यकर्ताओं को हर महीने एक बार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। बता दें कि एनआईए ने इन दोनों पर प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) का सक्रिय सदस्य होने और देश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था।

क्या है एल्गार परिषद और भीमा कोरेगांव विवाद?

यह पूरा मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित 'एल्गार परिषद' सम्मेलन से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन, यानी 1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा कोरेगांव इलाके में जातीय हिंसा भड़क गई थी।

पुणे पुलिस की शुरुआती जांच के बाद एनआईए ने इस केस को अपने हाथ में लिया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था और इसमें शामिल कार्यकर्ताओं का उद्देश्य सरकार को अस्थिर करना था।

अन्य आरोपियों की स्थिति

इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 16 प्रमुख वकीलों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं को नामजद किया गया था। वर्तमान में, सुरेंद्र गाडलिंग को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। गौरतलब है कि इसी मामले में आरोपी रहे 84 वर्षीय आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की जुलाई 2021 में हिरासत के दौरान मृत्यु हो गई थी, जो काफी चर्चा में रहा था।

मामले के अन्य चर्चित चेहरों में वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुंबडे और गौतम नवलखा शामिल हैं, जो पहले ही कानूनी राहत पा चुके हैं। ताजा फैसला जेल में बंद अन्य आरोपियों के लिए भी एक कानूनी नजीर साबित हो सकता है।

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