
वर्षा गायकवाड (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Mumbai News In Hindi: बीएमसी चुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस को एक बार फिर करारा झटका लगा है। कांग्रेस के सारे दांव पेंच धरे के धरे रह गए और एक बार फिर यह पार्टी नगर निगम चुनाव में फिसड्डी साबित हुई।
मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष व सांसद वर्षा गायकवाड़ का उद्धव ठाकरे की पार्टी से गठबंधन न करने का फैसला आत्मघाती साबित हुआ और पार्टी अच्छा प्रदर्शन करने में बुरी तरह फेल साबित हुई। पिछले बीएमसी चुनाव में कांग्रेस के 31 नगरसेवक चुनकर आए थे, लेकिन इस चुनाव में खबर लिखे जाने तक सिर्फ 20 सीटों पर जीत मिली।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी हुए हैं लेकिन यह उनका जनता के साथ निजी संबंध थे ना कि कांग्रेस पार्टी का कोई प्रभाव था। पार्टी पर गुटबाजी के आरोप भी लगाए गए हैं, जिस वजह से पार्टी अंदर ही अंदर बंट गई है। करारी हार के बाद मुंबई कांग्रेस के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
काँग्रेस वर्षा गायकवाड़ के अकेले लड़ने के फैसले पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने नाराजगी जताई थी। पार्टी के नेताओं ने पहले ही गठबंधन को लेकर हरी झंडी दी थी लेकिन वर्षा और कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इन नेताओं की बातों को नजरंदाज किया और अकेले लड़ने के फैसले पर कायम रहे।
कुछ नेताओं ने नवभारत से बातचीत में गठबंधन नहीं करने का फैसला गलत था, इसे स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि अगर मुंबई कांग्रेस को भविष्य में अच्छा करना है तो आगे की रणनीति में सुधार करने की जरूरत है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कांग्रेस शिवसेना यूबीटी मनसे के साथ गठबंधन करती तो कांग्रेस की सीटें अधिक बढ़ने की संभावना थीं। संभावना यह भी थी कि शिवसेना-यूबीटी व मनसे के साथ मिलकर महापौर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती थी। नवभारत से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने बताया था कि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार थे लेकिन कांग्रेस ने बिना बातचीत किए ही अकेले लड़ने का फैसला किया।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए ब्रिजेश पाठक की रिपोर्ट






