कृपाशंकर सिंह (सौ. सोशल मीडिया )
BMC Election 2026: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित राज्य की 29 महापालिकाओं के चुनाव का प्रचार मंगलवार की शाम के बाद थम जाएगा।
इससे पहले राज्य की सभी सियासी पार्टियां, उसके नेता और उम्मीदवार जनता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं।इसी पृष्ठभूमि में नवभारत संवाददाता जितेंद्र मल्लाह ने बीजेपी के उत्तर भारतीय नेता व राज्य के पूर्व मंत्री कृपाशंकर से रविवार को संवाद साधा। इस दौरान उन्होंने मौजूदा चुनावी माहौल पर बेबाकी से अपनी बात कही और सवालों के जवाब भी दिए। पेश है चर्चा के प्रमुख अंश….
भाषा संवाद के लिए होती है, फसाद के लिए नहीं। राज्य की खासकर मुंबई की समझदार जनता ठाकरे बंधुओं के साथ आने की सियासी मजबूरी से भली भांति परिचित है। उन्हें पता है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी और अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए साथ आए हैं। राज्य के मराठियों की उन्हें कोई चिंता नहीं है, इसलिए नफरती सियासत करने वालों को कुछ नहीं मिलेगा।
अनुमान गलत हो सकता है, अनुभव नहीं। और मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि मुंबई बीएमसी सहित राज्य की सभी महापालिकाओं में बीजेपी और उसकी महायुति की ही सत्ता होगी।
जनता ये जानती है कि महायुति किए गए वादों को पूरा कर सकती है। इसलिए जनता महायुति के ही पक्ष में जनादेश देगी। खराब सड़कें, झोपड़पट्टियों में गटर, नालियां, फुटपाथ, सार्वजनिक शौचालय की दुर्दशा और स्वास्थ्य सुविधा का गिरता स्तर ये मुंबई की कभी न खत्म होने वाली समस्या बन गई है।
बीएमसी चुनाव के लिए महायुति का वचननामा सामने आ ही गया है। 2019 में राज्य में हुई राजनीतिक दुर्घटना को अपवाद स्वरूप छोड़ दें तो बीजेपी और खासकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2014 में सीएम बनने के बाद चुनाव में किए गए अपने ज्यादातर वादों को पूरा किया है। योजना बनाकर आश्वासन देना और बाद में वचनपूर्ति यानी किए गए आश्वासनों को पूरा करना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कार्यशैली है। आज हम इसी वजह से 12 मिनट में सी लिंक से चर्चगेट पहुंच सकते हैं। मेट्रो का जाल, कोस्टल रोड, अटल सेतु, कंक्रीट की सड़कें आदि ऐसी कई उपलब्धियां हैं, जिनका लाभ जनता को मिल रहा है।
मुंबई में महापौर पद को लेकर घमासान मचा है। कोई हिंदी मराठी, कोई हिंदू मराठी महापौर की बात कह रहा है, तो कोई बुर्केवाली महापौर बनाने का दावा कर रहा है….
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि महापौर महायुति का होगा, हिंदू होगा और मराठी होगा। इसलिए इसमें अब कुछ और कहने को बचा ही नहीं है।
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मुंबई के हिंदी भाषी समाज को आप कहां देख रहे हैं?
मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र का हिंदी भाषी समाज भाजपा के साथ है। महाराष्ट्र के लगभग सभी महानगरपालिका क्षेत्रों में हिंदी भाषियों की संख्या निर्णायक है। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, मीरा-भाईंदर और कल्याण-डोंबिवली की मिलाकर जनसंख्या डेढ़ करोड़ से अधिक है। यहां करीब 40 प्रतिशत आबादी हिंदी भाषी राज्यों से आए लोगों की है। इस प्रकार डेढ़ करोड़ की आबादी में लगभग 60 लाख हिंदी भाषी किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं और हिंदी भाषी जनता आज पूरी तरह से भाजपा के साथ है।