भास्कर जाधव, एकनाथ शिंदे व देवेंद्र फडणवीस
Bhaskar Jadhav Appeals Eknath Shinde: मुंबई महानगरपालिका (BMC) में महापौर की कुर्सी को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता भास्कर जाधव ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने एक भावनात्मक और राजनीतिक प्रस्ताव रखा है। जाधव ने शिंदे गुट से अपील की है कि वे भाजपा के बजाय उद्धव गुट के उम्मीदवार का समर्थन करें।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता भास्कर जाधव ने शुक्रवार को एक बड़ा बयान देते हुए राजनीति गर्मा दी है। जाधव ने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का यह जन्म शताब्दी वर्ष है। ऐसे में यह बेहद दुखद होगा कि बीएमसी में उनके द्वारा स्थापित संगठन का मेयर न बने।
भास्कर जाधव ने एकनाथ शिंदे पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यदि शिंदे खुद को बालासाहेब के विचारों का सच्चा उत्तराधिकारी मानते हैं, तो उन्हें इस ऐतिहासिक अवसर पर राजनीतिक मतभेद भुलाकर उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए। उनके अनुसार, यह बालासाहेब को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। जाधव ने तर्क दिया कि केंद्र और राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन होने के बावजूद, शिंदे को बीएमसी के मामले में कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
हाल ही में हुई लॉटरी प्रक्रिया में मुंबई के मेयर का पद ‘सामान्य वर्ग की महिला’ के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसने शिवसेना (UBT) की रणनीतियों को थोड़ा झटका दिया है, क्योंकि पार्टी को उम्मीद थी कि यह पद अनुसूचित जनजाति (ST) महिला के लिए आरक्षित होगा। अगर ऐसा होता, तो उबाठा के पास दो मजबूत पात्र उम्मीदवार मौजूद थे। अब समीकरण बदल चुके हैं और आंकड़ों का खेल गठबंधन के पक्ष में झुकता दिख रहा है।
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बीएमसी में महायुति गठबंधन में भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। कुल 114 के आंकड़े के साथ यह गठबंधन बहुमत के करीब है। वहीं महाविकास अघाड़ी (MVA) में शिवसेना (UBT) ने 65 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं राज ठाकरे की मनसे को 6 और शरद पवार की एनसीपी को 1 सीट मिली है।
भास्कर जाधव ने मुख्यमंत्री शिंदे को उदारता दिखाने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिंदे को भाजपा को यह साफ कर देना चाहिए कि मुंबई की अस्मिता और बालासाहेब के सम्मान के लिए वे मेयर पद पर ‘उबाठा’ का साथ देंगे। जाधव ने सवाल उठाया कि जो लोग हर मंच से बालासाहेब के नाम का जयघोष करते हैं, क्या वे वाकई उनकी विरासत को भाजपा के हाथों में जाने से रोकेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शिंदे गुट इस ‘इमोशनल कार्ड’ का जवाब देता है या गठबंधन धर्म निभाते हुए भाजपा के साथ खड़ा रहता है।