

BEST Bus Strike Ends: मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी जीवन रेखा मानी जाने वाली 'बेस्ट' (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) के कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल रविवार रात को आखिरकार समाप्त हो गई। संयुक्त कामगार कृती समिति के आह्वान पर गुरुवार रात से शुरू हुई इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के वापस होने के बाद सोमवार सुबह से कर्मचारियों ने काम पर लौटना शुरू कर दिया है।
हालांकि, हड़ताल खत्म होने के बावजूद मुंबईकरों को सोमवार सुबह की व्यस्त पाली में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि बस सेवाएं अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी हैं और सड़कों पर बेहद कम बसें नजर आईं। प्रशासन के मुताबिक, स्थिति को पूरी तरह पटरी पर आने में अभी दो से तीन दिनों का समय और लग सकता है।
BEST हड़ताल खत्म होने के बावजूद सोमवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार, बेस्ट के बेड़े की कुल स्थिति बेहद कमजोर रही। बेस्ट की अपनी 188 बसों में से 165 बसें ही डिपो से बाहर निकल सकीं। कर्मचारियों की उपस्थिति की बात करें तो 1,454 चालकों (ड्राइवर्स) में से केवल 835 और 2,198 परिचालकों (कंडक्टर्स) में से महज 1,325 ही ड्यूटी पर हाजिर हुए। सबसे खराब स्थिति प्राइवेट ऑपरेटर्स की वेट-लीज (Wet-Lease) बसों की रही, जहां कुल 2,339 बसों में से केवल 1,271 बसें ही सड़कों पर उतरीं। बेस्ट संयुक्त कृती समिति के संयोजक एडवोकेट उदय आंबोणकर ने बताया कि लगातार तीन दिनों के तनाव और थकान के कारण कर्मचारी धीरे-धीरे काम पर आ रहे हैं, जिससे चरणबद्ध तरीके से ही सेवाएं सामान्य होंगी।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब बेस्ट की 12 प्रमुख यूनियनों की संयुक्त समिति ने अपनी प्रलंबित मांगों को लेकर गुरुवार रात से चक्का जाम कर दिया था। समिति का आरोप था कि प्रशासन और सरकार तय समयसीमा के भीतर उनके वेतनमान और सेवा शर्तों से जुड़े ठोस फैसले नहीं ले रहे हैं। आखिरकार रविवार को सरकार और बेस्ट प्रबंधन के साथ हुई आपात बैठक में कुछ महत्वपूर्ण मांगों को तत्काल मंजूरी दी गई और शेष मांगों पर लिखित आश्वासन मिला, जिसके बाद देर रात हड़ताल वापसी का फैसला लिया गया।
लोकल ट्रेनों के बाद बेस्ट मुंबई की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन व्यवस्था है, जो रोजाना करीब 25 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। इसके अलावा, यह दक्षिण मुंबई के 10 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति भी करती है। वर्तमान में बेस्ट के पास कुल 2,700 बसों का बेड़ा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से मात्र 243 बसें ही बेस्ट के खुद के स्वामित्व की हैं, जबकि बाकी की करीब 90 प्रतिशत बसें वेट-लीज मॉडल पर चल रही हैं। यही कारण है कि सोमवार सुबह काम पर जाने वाले यात्रियों को घंटों BEST बस स्टॉप पर इंतजार करना पड़ा और प्रशासन को जनता से सहयोग की अपील करनी पड़ी।