Maharashtra Government Notification ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra Government Notification: पुणे जिले के दौंड तहसील से विकास और प्रशासनिक सुगमता की एक बड़ी खबर सामने आई है, कासुडीं गांव के निवासियों का दशकों पुराना सपना आखिरकार हकीकत में बदल गया है।
सरकार ने कासुर्डी ग्राम पंचायत के त्रिभाजन (तीन हिस्सों में बंटवारे) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब कासुडर्डी, कामठवाडी और जावजीबुवावाडी के रूप में तीन स्वतंत्र ग्राम पंचायतें अस्तित्व में आ गई हैं।
राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी किए जाने के बाद समूचे क्षेत्र में उत्सव का माहौल है। ग्रामीणों ने इस निर्णय का स्वागत मिठाइयां बांटकर किया। सरकारी योजनाओं की ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ सुनिश्चित होगी।
? कासुहीं गांव की भौगोलिक संरचना और बढ़ती आबादी लंबे समय से प्रशासनिक चुनौतियों का कारण बनी हुई थी। लगभग साढ़े छह हजार की जनसख्या और विस्तृत क्षेत्रफल होने के कारण एक ही ग्राम पंचायत से पूरे क्षेत्र का प्रबंधन करना कठिन हो रहा था।
सुदुर बस्तियों के नागरिकों को छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए मुख्य ग्राम पंचायत कार्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। गाव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।
बड़े क्षेत्र के कारण सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का समान वितरण चुनौतीपूर्ण था। फंड का आवंटन और कार्यान्वयन बड़े क्षेत्र में बिखर जाता था, जिससे विकास की गति धीमी पड़ रही थी। ग्रामीणों का मानना है कि अब छोटे और स्वतंत्र प्रशासनिक क्षेत्र होने से स्थानीय समस्याओं कर त्वरित समाधान हो सकेगा।
इस ऐतिहासिक विभाजन की पटकथा 30 दिसंबर 2024 को हुई एक विशेष ग्राम सभा में लिखी गई थी। उस सभा में त्रिभाजन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
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स्थानीय ग्रामीण बापू जगताप ने प्रस्ताव पेश किया, जिसे तानाजी राजवडे ने अनुमोदित किया, ग्राम सेवक बालाजी सरवदे की तकनीकी सक्रियता और जिला प्रशासन के निरंतर फॉलोअप के बाद, फाइल मंत्रालय पहुंची, लगभग एक साल की कड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद, सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को अध्यादेश जारी कर इन तीनों को स्वतंत्र राजस्व ग्राम की मान्यता प्रदान कर दी।
इस विभाजन की आधिकारिक शुरुआत का सबसे भावुक और गौरवशाली क्षण हाल ही में गणतंत्र दिवस पर देखने को मिला, इतिहास में पहली बार, कासुर्डी, कामठवाडी और जावजीबुवावाडी में अलग-अलग ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
ग्रामीणों के लिए यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी पहचान और स्वायत्तता का जश्न था। स्थानीय युवाओं का मानना है कि अब उन्हें नेतृत्व करने के अधिक अवसर मिलेंगे और गांव के बजट का उपयोग सीधे गांव की गलियों को सुधारने में होगा।
कासुर्डी से पहले: गार गांध का विभाजन कर गार, नवीन गार और बेटवाठी पंचायते बनीं।
हिंगणीबेडी के विभाजन से हिंगणीबेडी और कालेवाडी अस्तित्व में आई।