ढोंगी खरात को कोयटे व आवारे ने बनाया सिद्ध पुरुष, इन्हीं के जरिए हुई चाकणकर से मुलाकात
Ashok Kharat Fraud Case: ढोंगी तांत्रिक अशोक खरात से जुड़े कथित धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में नामकरण आवारे और काका कोयटे की भूमिका की पुलिस जांच कर रही है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Ashok Kharat (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Police Investigation: धोखाधड़ी के आरोपों में घिरे ढोंगी तांत्रिक अशोक खरात मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे खरात के पीछे छिपे ‘मास्टरमाइंड’ और उसे संरक्षण देने वाले प्रभावशाली चेहरों से नकाब हटने लगा है।
इस मामले में अब भाजपा गठबंधन के स्थानीय नेता और जगदंब पतसंस्था के संस्थापक नामकरण आवारे शिर्डी पुलिस के रडार पर आ गए हैं। सिर्फ आवारे ही नहीं, बल्कि समता पतसंस्था फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष काका कोयटे भी खरात की भक्ति के कारण विवादों में हैं।
पुलिस कर रही भूमिका की जांच
तीन साल पहले नासिक में आयोजित एक भव्य समारोह में खरात को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था, जहां महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर सहित कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।
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एक ढोंगी को इतना बड़ा मंच प्रदान करने और उसे प्रतिष्ठित हस्तियों से मिलाने को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी तरह आवारे को भी खरात का बेहद करीबी माना जाता है। इसलिए इन वित्तीय अनियमितताओं में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका की सघन जांच की जा रही है। जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
सिद्ध पुरुष बनाने का रचा गया षड्यंत्र
अशोक खरात को समाज के सामने एक चमत्कारी सिद्ध पुरुष के रूप में स्थापित करने में नामकरण आवारे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आरोप है कि आवारे ने न केवल खरात के प्रति अंधश्रद्धा फैलाई, बल्कि उसे सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने के लिए अपने राजनीतिक पद और संस्थागत रसूख का जमकर दुरुपयोग किया। खरात की भोंदूगिरी को एक पावन आवरण देने के पीछे आवारे का दिमाग बताया जा रहा है, जिसके चलते अब उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
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जगदंब पतसंस्था में मिलीं 32 संदिग्ध खातें
समता पतसंस्था में खरात के 100 से अधिक खातों की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी है। अब जांच में यह बात सामने आई है कि अशोक खरात ने आर्थिक हेरफेर के लिए नामकरण आवारे की जगदंब पतसंस्था का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था।
पुलिस के अनुसार, इस अकेले संस्थान में खरात के नाम पर 32 विभिन्न खाते संचालित हो रहे थे। प्राथमिक जांच में इन खातों से करोड़ों रुपयों के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी धनराशि कहां से आई और इसे कहां भेजा गया। पुलिस अब इन दोनों पतसंस्थाओं के बीच फैले आर्थिक जाल को खंगाल रही है।
