एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद का ऑफर, शिवसेना का BJP में होगा विलय! सनसनीखेज ट्वीट से मचा हड़कंप
Aseem Sarode Tweet BJP Shiv Sena Merger Eknath Shinde CM Offer: वरिष्ठ वकील असीम सरोदे के ट्वीट से सियासी भूकंप; एकनाथ शिंदे को सीएम पद के बदले शिवसेना के भाजपा में विलय का दावा।
- Written By: अनिल सिंह
देवेंद्र फडणवीस, अमित शाह और एकनाथ शिंदे (फोटो क्रेडिट-X)
Eknath Shinde CM Offer: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों की बगावत के बीच एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने महायुति गठबंधन के साथ-साथ पूरे सूबे के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। राज्य के प्रख्यात और वरिष्ठ वकील असीम सरोदे (Advocate Aseem Sarode) के एक सोशल मीडिया ट्वीट ने इस नए विवाद को हवा दी है।
असीम सरोदे ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी ने एकनाथ शिंदे को राज्य में फिर से मुख्यमंत्री (CM) बनाने का एक बड़ा ऑफर दिया है, लेकिन इसके बदले में एक ऐसी शर्त रख दी है जिससे शिंदे गुट का राजनीतिक वजूद ही हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। यह चौंकाने वाला दावा ऐसे समय में आया है जब राज्य में देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री के रूप में सरकार की कमान संभाल रहे हैं और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री की भूमिका में हैं।
मुख्यमंत्री पद के बदले शिवसेना के बीजेपी में विलय की शर्त!
वरिष्ठ अधिवक्ता असीम सरोदे ने अपने आधिकारिक ट्वीट में लिखा, “बीजेपी द्वारा एकनाथ शिंदे को दोबारा मुख्यमंत्री पद की पेशकश किए जाने की जानकारी न केवल विश्वसनीय सूत्रों से, बल्कि कुछ बेहद बड़े और सम्मानित लोगों के जरिए भी सामने आ रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में असली मज़ाक और पेंच यह है कि मुख्यमंत्री की इस कुर्सी के बदले बीजेपी ने शिंदे के सामने एक कड़ी शर्त रखी है। शर्त यह है कि शिंदे समूह (शिवसेना) को पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी में अपना विलय (Merger) करना होगा।” सरोदे के इस दावे से साफ है कि भाजपा अब शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेना चाहती है।
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देवेंद्र फडणवीस का प्रभाव कम करने की तैयारी
असीम सरोदे ने इस संभावित राजनीतिक चाल के पीछे के गंभीर पहलू को उजागर करते हुए सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा, “हालांकि महाराष्ट्र की राजनीति ने एक बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया है, लेकिन इसका सबसे गंभीर और इनसाइड पहलू यह है कि यह पूरी बिसात खुद बीजेपी के भीतर देवेंद्र फडणवीस के प्रभाव को कमजोर करने के लिए बिछाई जा रही है। फडणवीस हमेशा से शिंदे को अपने से नीचा समझते आए हैं और वे किसी भी कद्दावर मराठा नेतृत्व को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा मानते हैं। अब देखना यह है कि आगे इस ऊंट किस करवट बैठता है।”
ओमराजे निंबालकर ने बढ़ाई शिंदे की टेंशन
इस बड़े दावे के बीच, सांसद ओमराजे निंबालकर के ताजा रुख ने भी एकनाथ शिंदे और महायुति के रणनीतिकारों की रातों की नींद उड़ा दी है। आज ही मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद भावुक और निराश नजर आए ओमराजे निंबालकर ने पाला बदलने की खबरों पर ब्रेक लगाते हुए साफ कह दिया है कि उन्होंने अभी तक शिंदे गुट या बीजेपी में शामिल होने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। ओमराजे ने स्पष्ट किया कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र धराशिव जाकर जनता से संवाद करेंगे और उसके बाद ही कोई राजनीतिक निर्णय लेंगे। ऐसे में यदि ओमराजे पीछे हटते हैं, तो 6 सांसदों को तोड़ने का शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’ कानूनी रूप से संकट में पड़ सकता है, जिससे दलबदल विरोधी कानून के तहत अन्य बागी सांसदों पर अयोग्यता की तलवार लटक जाएगी।
