Explainer: ऑपरेशन टाइगर होगा फेल? पवनराजे मर्डर केस के फैसले ने पलटी महाराष्ट्र की पूरी सियासी बाजी
Operation Tiger Maharashtra: पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में CBI कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र का ऑपरेशन टाइगर संकट में है। सांसद ओमराजे निंबालकर के रुख से उद्धव गुट में बगावत की हवा निकल सकती है।
- Written By: आकाश मसने
ओमराजे निंबालकर व एकनाथ शिंदे (सोर्स: AI)
Pawanraje Nimbalkar Murder Case Verdict Impact Operation Tiger: महाराष्ट्र में पिछले कुछ से ऑपरेशन टाइगर की चर्चा जाेरों पर है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद पाला बदलने को तैयार है। लेकिन अब इसमें नया मोड़ आते दिख रहा है। पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी हत्याकांड का फैसला आने के बाद सियासी गलियारों में ऑपरेशन टाइगर के फेल होने की चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते है ऑपरेशन टाइगर और पवनराजे निंबालकर हत्याकांड का क्या लिंक है।
उद्धव गुट के बागी 6 सांसदों में एक नाम धाराशिव सांसद ओमराजे निंबालकर का भी है। आज जिन पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में फैसला आया है वह ओमराजे के पिता थे। सियासी गलियारों में चर्चा थी कि ओमराजे ने इसी शर्त पर बगावत की थी कि यह फैसला उनके हक में आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी वहज से ऑपरेशन टाइगर की सफलता पर संकट के बादल मंडरा गए हैं।
पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में कोर्ट का फैसला
पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की 2006 में हुई हत्या के मामले में CBI कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। यह ओमराजे के लिए बड़ा माना जा रहा है। कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व मंत्री और मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि इस मामले में केवल सरकारी गवाह की गवाही के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। सरकारी पक्ष के लिए यह गवाह एक महत्वपूर्ण कड़ी था, लेकिन बार-बार बयान बदलने के कारण उसकी गवाही को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
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फैसले के बाद क्या बोले ओमराजे निंबालकर?
अपने पिता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में CBI कोर्ट के फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसद ओमराजे निंबालकर ने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि राज्य पुलिस की जांच में कमियां थीं। हमने मांग की थी कि जांच CBI को सौंपी जाए; लेकिन मामला उन्हें सौंपने में लगभग 3 साल लग गए। CBI ने इस मामले की गहन जांच की।
Pune, Maharashtra: On CBI court acquitting all acccused in 2006 double murder case of his father Pawanraje Nimbalkar and his driver Samad Kazi, Shiv Sena UBT MP Om Raje Nimbalkar says, “It has now become clear that there were flaws in the investigation conducted by the state… pic.twitter.com/8ghBouThCl — ANI (@ANI) June 20, 2026
ओमराजे ने कहा कि फैसले की पूरी कॉपी पढ़ने के बाद हम हाई कोर्ट का रुख करेंगे। अगर सभी आरोपियों को बरी किया जा रहा है, तो मेरे परिवार के सामने अब भी यह सवाल खड़ा है कि आखिर पवनराजे निंबालकर की हत्या किसने की। हत्या के मामले में फैसला तो आ गया है, लेकिन इससे यह साफ नहीं होता कि हत्या किसने की।
ऑपरेशन टाइगर पर ओमराजे निंबालकर का बयान
शिवसेना (UBT) के बागी सांसद ओमराजे निंबालकर इस फैसले के बाद ऑपरेशन टाइगर को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं जनता से सलाह-मशविरा करने के बाद ही अपना राजनीतिक रुख साफ करूंगा। मेरा राजनीतिक फैसला चाहे जो भी हो, मैंने कभी भी उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ न तो कुछ कहा है और न ही कभी कहूंगा। भविष्य में मैं जो भी राजनीतिक फैसला लूं, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की आलोचना या उनके बारे में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं अगले दो दिनों में अपना राजनीतिक रुख साफ कर दूंगा।
Pune, Maharashtra: On Operation Tiger, Shiv Sena UBT MP Om Raje Nimbalkar says, “I will clarify my political stance after consulting with the public. Regardless of my political decision, I have never spoken—nor will I ever speak—against Uddhav Thackeray and Aaditya Thackeray.… pic.twitter.com/OaagKfZjny — ANI (@ANI) June 20, 2026
बागी सांसद ओमराजे निंबालकर ने कहा कि जब 2022 में शिवसेना में फूट पड़ी थी, तब भी मैं पार्टी छोड़ सकता था। इसलिए, अब मेरे पार्टी छोड़ने को लेकर मुझ पर आरोप लगाना गलत है। मैं अपने राजनीतिक भविष्य और आगे की कार्रवाई के बारे में अगले दो दिनों में अंतिम फैसला लूंगा।
यह भी पढ़ें:- ‘बगावत के बावजूद खाली हाथ’, पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के फैसले पर ओमराजे की पहली प्रतिक्रिया
कैसे फेल होगा ऑपरेशन टाइगर ?
ओमराजे निंबालकर निंबालकर के इस बयान के बाद ऑपरेशन टाइगर अधर में फंस सकता है। क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) में टूट के लिए 9 में से 6 सांसदों का अलग होना जरूरी है। दलबदल कानून के मुताबिक अलग गुट बनाने या पार्टी में टूट के लिए दो तिहाई संख्या का होना जरूरी है। इस नियम के अनुसार अगर बागी गुट को अपनी सदस्यता बचाना है और अलग गुट बनाना है तो शिवसेना (यूबीटी) के 9 में 6 सांसदों का समर्थन होना जरूरी है।
अगर ओमराजे निंबालकर अपना मन बदलकर उद्धव ठाकरे कैंप में वापस चले जाते हैं तो बागी गुट के पास केवल पांच सांसद बचेंगे। ऐसे में यदि बगावत होती है तो पांचों सांसदों की सदस्यता खत्म होने का खतरा मंडराएगा।
