Andheri East: कभी कांग्रेस का गढ़ रहा अंधेरी पूर्व, अब शिंदे गुट का दबदबा
Maharashtra Local Body Election: अंधेरी पूर्व में BMC चुनाव के बाद राजनीतिक संघर्ष तेज हो गया है। शिंदे गुट की बढ़त, उद्धव गुट की चुनौती और विकास में देरी जनता की नाराजगी का कारण बनी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
अंधेरी पूर्व (सौ. सोशल मीडिया )
BMC Election News In Hindi: बीएमसी चुनाव में नामांकन वापसी के बाद राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई है। अंधेरी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में कुल 8 वार्ड आते हैं, जिनमें से चार पूरी तरह से इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि अन्य 4 आंशिक रूप से जोगेश्वरी और विले पार्ले विधानसभा क्षेत्रों के बीच विभाजित हैं।
इस निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले 6 वार्डों में से 2017 के बीएमसी चुनाव में भाजपा ने 3 वाडों में और शिवसेना ने 2 वार्ड में जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस 1 स्थान पर जीती थी। शिवसेना के उम्मीदवार के जीते गए एक वार्ड में भाजपा का उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहा, जबकि भाजपा जीते गए 3 वार्डों में दूसरे स्थान पर क्रमशः शिवसेना और कांग्रेस के उम्मीदवार रहे।
कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माने जाने वाला अंधेरी पूर्व विधानसभा क्षेत्र पिछले एक दशक में राजनीतिक बदलावों का साक्षी रहा है। इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग हर एक तिहाई मतदाता मराठी भाषी हैं, जिससे शिवसेना को फायदा हुआ और वह एक प्रमुख दल बन गई।
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रमेश लटके ने शिवसेना के टिकट पर तीन चुनाव लड़े, 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश शेट्टी से हार गए और फिर 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में दो बार यह सीट जीती। लटके को असामयिक मृत्यु के बाद 2022 में जब उप चुनाव हुआ, तो उनकी पत्नी ऋतुजा रमेश लटके विजयी हुई। बदली परिस्थितियों के बीच 2024 के चुनाव में शिवसेना उद्धव गुट ने ऋतुजा लटके को चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन वह शिवसेना शिंदे गुट के उम्मीदवार मुरजी पटेल से पराजित हो गई।
पुनर्विकास की प्रक्रियाओं में देरी से बढ़ी नाराजगी
यह क्षेत्र विकास की प्रगति के साथ-साथ कई जमीनी चुनौतियों से लगातार जूझ रहा है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती यातायात व्यवस्था है। अंधेरी-कुर्ला रोह, मेट्रो कॉरिडोर, एयरपोर्ट से जुड़ी आवाजाही और औद्योगिक हब होने के कारण यहां ट्रैफिक जाम की स्थिति हमेशा बनी रहती है। झोपड़ाडी पुनर्विकास की प्रक्रियाओं में देरी से जनता में नाराजगी बढ़ी है। स्वच्छता, जल निकासी और मानसूनी जलभराव जैसे मुद्दे भी इस क्षेत्र की समस्या है।
शिवसेना शिंदे गुट को 159 बूथों पर मिली थी बढ़त
भाजपा इस निर्वाचन क्षेत्र की बड़ी गुजराती और मारवाड़ी आबादी के समर्थन पर भरोसा करती रही है, जो कुल निवासियों का लगभग 15 प्रतिशत है। इस क्षेत्र से सांसद और विधायक दोनों शिवसेना शिंदे गुट के होने से शिवसेना उद्धव गुट के लिए यहां के वार्डों को जीतना अब नाक की लड़ाई सम्झा जाने लगा है।
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विधानसभा चुनाव में अंधेरी पूर्व के कुल 264 बयों में से 159 चूथों पर शिवसेना शिंदे गुट को बढ़त मिली थी। शिवसेना विभाजन के बाद शिवसेना उद्धव गुट के सिर्फ प्रमोद सावंत पार्टी के साथ बने रहे जिन्हे वार्ड क्रमांक 75 से उतारा गया है। कांग्रेस उत्तर पश्चिम जिला अध्यक्ष वलाइव डायस को टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने शिवसेना उद्धव गुट का दामन पकड़ लिया, डायस वार्ड क्रमांक 66 से शिवसेना उद्धव गुट से उम्मीदवार है।
