Amol Mitkari On Ajit Pawar Plane Crash (फोटो क्रेडिट-X)
VSR Aviation Insurance Scam: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। एनसीपी (अजित पवार गुट) के विधायक अमोल मिटकरी ने इस दुर्घटना को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। मिटकरी ने आशंका जताई है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि ‘बीमा राशि’ (Insurance Amount) हड़पने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
विधायक मिटकरी के इस बयान ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों बल्कि विमानन कंपनी वीएसआर (VSR) को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कंपनी के वित्तीय लाभ के लिए राज्य के एक कद्दावर नेता की जान जोखिम में डाली गई। इन आरोपों के बाद अब इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है।
अमोल मिटकरी ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली है कि वीएसआर कंपनी ने दिसंबर 2025 में, यानी हादसे से ठीक पहले, अपने पायलटों के लिए 50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बीमा कवर लिया था। मिटकरी ने सवाल उठाया कि क्या इस बीमा राशि के लालच में जानबूझकर विमान को क्रैश कराया गया? उन्होंने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मांग की है कि कंपनी के बीमा रिकॉर्ड्स की जांच की जाए और यदि तथ्य सही पाए जाते हैं, तो कंपनी के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए।
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विधायक ने जांच में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि ‘दादा’ (अजित पवार) की उस आखरी उड़ान के लिए साहिल मदान और यश नामक दो लोगों का चयन किया गया था। मिटकरी के अनुसार, ये दोनों फ्लाइट अटेंडेंट कथित तौर पर ट्रैफिक में फंस गए थे, लेकिन उनके ठहरने के स्थान का कोई सीसीटीवी फुटेज या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने पूछा कि “वे दोनों अब कहाँ हैं?” यदि वे सामने नहीं आते हैं, तो इस हादसे को सामान्य दुर्घटना मानना नामुमकिन है। उन्होंने मांग की कि सीबीआई (CBI) इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाए।
एक ओर जहाँ साजिश की थ्योरी चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार को याद करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “अजित दादा ऐसे नेता थे जो महाराष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।” फडणवीस ने सदन में उनकी अनुशासनप्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि दादा हमेशा सत्र शुरू होने से पहले अपनी सीट पर पहुँच जाते थे। उनके जाने से पैदा हुए राजनीतिक शून्य (Vacuum) को भरना असंभव है।