'वो शब्द कानों में पिघले सीसे जैसे होंगे', अजित पवार के शोक प्रस्ताव को लेकर भावुक हुए अमोल मिटकरी

Amol Mitkari on Ajit Pawar: महाराष्ट्र बजट सत्र 2026 के पहले दिन दिवंगत अजित पवार के लिए शोक प्रस्ताव लाया जाएगा। भावुक विधायक अमोल मिटकरी ने इसे जीवन का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पल बताया।
Amol Mitkari Emotional Over Ajit Pawar Condolence Proposal
अजित पवार व अमोल मिटकरी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Amol Mitkari Emotional Over Ajit Pawar Condolence Proposal: महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र 2026 की शुरुआत एक अत्यंत भावुक और भारी मन के साथ होने जा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद यह पहला आधिकारिक सत्र है। सत्र के पहले ही दिन सदन में उनके सम्मान में शोक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस मौके पर एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए इसे अपने राजनीतिक जीवन का सबसे काला और दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताया है।

शोक प्रस्ताव को लेकर भावुक हुए अमोल मिटकरी

अमोल मिटकरी ने मीडिया से बात करते हुए अपने दिल का दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि अजित दादा के निधन पर शोक प्रस्ताव के दौरान बोले जाने वाले शब्द उनके "कानों में पिघले हुए सीसे" की तरह चुभेंगे। मिटकरी ने रुंधे गले से कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन्हें उस व्यक्ति के लिए शोक संदेश सुनना या पढ़ना पड़ेगा, जिसने उन्हें राजनीति की बुलंदियों तक पहुंचाया। उनके लिए अजित दादा एक मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि एक पिता के समान थे।

विमान हादसे पर सदन में मचेगा घमासान

अमोल मिटकरी ने केवल अपनी भावनाएं ही व्यक्त नहीं कीं, बल्कि उन्होंने एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई का भी संकेत दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह इस बजट सत्र में अजित पवार के विमान हादसे के बारे में पुरजोर तरीके से आवाज उठाएंगे। सूत्रों के अनुसार, मिटकरी दुर्घटना की परिस्थितियों पर सवाल खड़े कर सकते हैं और सरकार से इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग करेंगे।

एक अधूरा वादा और कार्यकाल का समापन

मिटकरी ने बताया कि उनके विधान परिषद सदस्यत्व का कार्यकाल 13 मई को समाप्त होने जा रहा है। उन्होंने याद किया कि दिसंबर में नागपुर सत्र के अंतिम दिन उन्होंने अजित दादा से मुलाकात की थी। उस समय दादा ने उनसे वादा किया था कि वे 23 फरवरी को बजट सत्र के पहले दिन मुंबई के 'देवगिरी' बंगले पर मिलेंगे और संगठन निर्माण पर चर्चा करेंगे।

मिटकरी ने भावुक होकर कहा कि जब मैं विधायक बना तब मेरे सगे पिता मुझे देखने के लिए नहीं थे, और अब जब मेरा कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो राजनीति में मेरे 'पिता' समान अजित दादा भी मुझे छोड़कर चले गए। उन्होंने याद किया कि कैसे दादा ने उन्हें तीन बार तालिका पर बैठने का मौका दिया, जहां से वे मुख्यमंत्री की मौजूदगी में सदन का संचालन करते थे।

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