Pimpri Chinchwad Election से पहले अजित पवार का भाजपा पर भ्रष्टाचार हमला, विपक्ष को मिला मुद्दा

Maharashtra: Politics: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा चुनाव से पहले उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बयान से महायुति में तनाव बढ़ा और विपक्ष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल गया।
Ajit Pawar Controversy
Ajit Pawar (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Maharashtra Local Body Election: पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने तीखे बयानों से माहील गर्मा दिया है।

अजित ने सत्तारूढ़ भाजपा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझ पर 70 हजार करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, लेकिन जिन-जिन लोगों ने आरोप लगाए, मैं उनके साथ ही सरकार में बैठा हूं, भाजपा के पास शहर के विकास के लिए स्पष्ट योजना नहीं है।

अजित के बयान ने न केवल सत्तारूढ़ महायुति में तनाव, बल्कि भाजपा की मजबूरी को भी उजागर कर दिया है, जिसके चलते वह विपक्ष के निशाने पर आ गई है। अजित के बयान ने महायुति सरकार की भ्रष्टाचार विरोध छवि को भी एक झटके में मटियामेट कर दिया है।

मोहोल इस्तीफा दें : सपकाल

उधर, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल के इस्तीफे की मांग की और उन पर एक जाने-माने अपराधी को पासपोर्ट जारी करने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया। सपकाल ने मोहोल पर हमला करने के लिए शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री अजित पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया। सपकाल ने पवार के क्यान का जिक्र करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत चिंता की बात है कि एक कुख्यात अपराधी राजनीतिक प्रभाव के बते पासपोर्ट हासिल कर सकता है।

पहलवान से पंगा न लें छोटे पवार : चव्हाण

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार मोदी और फडणवीस के नेतृत्व वाले दल पर आरोप लगा रहे है। यह उन्हें याद रखना चाहिए। अगर भाजपा ने आरोप लगाया तो अजित को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। मैंने फडणवीस से निजी तौर पर कहा था कि उन्हें महायुति में शामिल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

अजित को अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली राकां से विलय कर लेना चाहिए, क्योंकि दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ नगर निकायों के चुनावों के लिए हाथ मिला लिया है। संजय राऊत, यूबीटी नेता

अजित पवार, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने तय किया है कि मित्र दलों के खिलाफ विवादित बयानों से बचेंगे, मनभेद और मतभेद नहीं होने देंगे। फिर भी अजित ने ऐसा क्यों कहा, मुझे नहीं पता। चंद्रशेखर बावनकुले, राजस्व मंत्री

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