Aaditya Thackeray Mohit Kamboj meeting (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Political Networking Event: राजनीति में ‘कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता’, यह कहावत महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सच साबित होती दिख रही है। इसका प्रमाण भाजपा के फायरब्रांड नेता और दिग्गज व्यवसायी मोहित कंबोज की बेटी मिश्का कंबोज के 16वें जन्मदिन पर देखने को मिला।
मुंबई के एक आलीशान पंचतारांकित होटल में आयोजित इस दावत में वैसे तो राजनीति, बॉलीवुड और व्यापार जगत की तमाम दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे की उपस्थिति ने बटोरीं। कंबोज की पारिवारिक दावत (कार्यक्रम) पर आदित्य ठाकरे का ‘मोहित’ होना अर्थात पहुंचना राज्य के सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे चुका है।
मोहित कंबोज और ठाकरे परिवार के बीच का संघर्ष जगजाहिर रहा है। महाविकास आघाडी सरकार के दौरान कंबोज ने तत्कालीन सरकार और विशेषकर ठाकरे गुट पर तीखे हमले किए थे। इतना ही नहीं, 2022 में जब शिवसेना में फूट पड़ी, तब कंबोज को बागी विधायकों के साथ गुवाहाटी में भी देखा गया था। ऐसे ‘कट्टर विरोधी’ के निमंत्रण पर आदित्य ठाकरे का वहां पहुंचना और मिलिंद नार्वेकर की मौजूदगी ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पर्दे के पीछे भाजपा और ठाकरे गुट के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं?
इस भव्य समारोह में केवल आदित्य ठाकरे ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, सुप्रिया सुले, श्रीकांत शिंदे और आशीष शेलार जैसे दिग्गज नेता भी शामिल थे। उद्योग जगत से अनंत अंबानी और बॉलीवुड से शाहरुख खान, संजय दत्त, जैकी श्रॉफ जैसे सितारों ने भी शिरकत की, लेकिन, विपक्षी खेमे से आदित्य ठाकरे और सुप्रिया सुले की मौजूदगी ने महाविकास आघाडी के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या शिंदे गुट और भाजपा के बीच कथित अनबन के बीच ठाकरे गुट भाजपा के साथ संवाद के सेतु बना रहा है?
इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर मचे बवाल और ट्रोलिंग के बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने मोर्चा संभाला है। राउत ने इसे ‘डैमेज कंट्रोल’ के तौर पर देखते हुए स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में व्यक्तिगत और सार्वजनिक शिष्टाचार अलग होते हैं। उन्होंने कहा, “राजनीतिक शत्रुता अपनी जगह है, लेकिन मंगल कार्यों में शामिल होना हमारी परंपरा है। इसे राजनीतिक गठबंधन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ” जब राउत से पूछा गया कि क्या वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बुलावे पर जाएंगे, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले वे बुलाएं तो सही।
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आदित्य ठाकरे की इस ‘सरप्राइज विजिट’ ने शिंदे गुट को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। कंबोज और ठाकरे की इस मुलाकात को भले ही निजी बताया जा रहा हो लेकिन निकट भविष्य के मद्देनजर इसे एक बड़े रणनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल, इस एक मुलाकात ने यह तो साफ कर दिया है कि मुंबई की राजनीति के समीकरण कभी भी बदल सकते हैं।