अबू सलेम को पैरोल मिली तो भाग जाएगा! महाराष्ट्र सरकार की HC में सख्त दलील, पुर्तगाल से बिगड़ सकते हैं रिश्ते!
1993 Mumbai Blasts: महाराष्ट्र सरकार ने अबू सलेम की पैरोल का किया विरोध। हाई कोर्ट में कहा- पैरोल मिली तो भाग जाएगा सलेम, भारत-पुर्तगाल संबंधों में आ सकती है कड़वाहट। पढ़ें पूरी खबर।
- Written By: प्रिया जैस
अबू सलेम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Abu Salem Parole Appeal: महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को गैंगस्टर अबू सलेम की पैरोल का विरोध करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय को बताया कि 1993 के बम विस्फोटों का दोषी फरार हो सकता है, जिससे भारत और पुर्तगाल के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा हो सकता है। सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया था।
उसने नवंबर 2025 में अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी की मृत्यु के बाद, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाने के लिए 14 दिनों की पैरोल मांगी थी। न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे के अनुसार, राज्य सरकार ने कहा कि अधिकतम दो दिनों की आपातकालीन पैरोल दी जा सकती है।
कारा महानिरीक्षक सुहास वरके ने अदालत के समक्ष दाखिल हलफनामे में कहा कि यदि सलेम को पैरोल दी जाती है, तो वह फिर से भाग जाएगा, जैसा 1993 में उसने किया था। हलफनामे में यह भी कहा गया कि अगर वह भाग गया तो भारत और पुर्तगाल के बीच “गंभीर समस्याएं” पैदा हो जाएंगी और समाज के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न होगा।
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पैरोल से भारत-पुर्तगाल संबंधों पर संकट की आशंका
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अभियोजन एजेंसी होने के नाते प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाये जाने का अनुरोध किया। सीबीआई ने राज्य सरकार की चिंताओं से सहमति जताते हुए कहा कि सलेम का पैरोल पर जेल से बाहर आना, भले ही अस्थायी रूप से हो, उससे “कानून-व्यवस्था की समस्या” उत्पन्न होगी।
अदालत ने जब पूछा कि किस प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है, तो एजेंसी की ओर से उपस्थित वकील ने उचित निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। इसके बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई 28 जनवरी के लिए स्थगित कर दी। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि सलेम एक अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर है, जो दशकों से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त था।
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आजमगढ़ जाना चाहता है सलेम
अबू सलेम द्वारा जेल अधिकारियों से पैरोल का अनुरोध किये जाने के बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, जहां वह जाना चाहता है। हलफनामे में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर कहा कि आजमगढ़ का सरायमीर इलाका, जहां सलेम जाना चाहता है, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है।
इलाके में सलेम की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होगी। इसलिये सलेम की 14 दिन की पैरोल की अर्जी खारिज कर दी जाए। सलेम को दो दिन की पैरोल दी जा सकती है।
