Malad East Child Death (फोटो क्रेडिट-X)
Kurar Village Accident Death: मुंबई के मलाड पूर्व इलाके से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां निर्माणाधीन इमारत के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में गिरने से 8 वर्षीय मासूम दिव्यांश राजेश मौर्य की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा गुरुवार, 19 मार्च 2026 की शाम कुरार विलेज स्थित अंबेवाड़ी क्षेत्र में घटित हुआ। खेल-खेल में हुई इस अनहोनी ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं और स्थानीय प्रशासन व निर्माण कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, शाम करीब 8 बजे दिव्यांश अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, तभी उसकी गेंद पास ही स्थित एक गहरे गड्ढे में जा गिरी। अपनी गेंद निकालने के प्रयास में दिव्यांश जैसे ही गड्ढे में उतरा, वह पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका और उसमें डूब गया। गड्ढे में पानी का स्तर अधिक होने के कारण वह बाहर नहीं निकल पाया और दम घुटने से उसकी जान चली गई। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह जानलेवा गड्ढा ‘माउली कंस्ट्रक्शन’ द्वारा निर्माण कार्य के लिए खोदा गया था। चश्मदीदों का कहना है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के बुनियादी मानकों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। गड्ढे के चारों ओर न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी और न ही वहां कोई चेतावनी बोर्ड या ‘खतरे’ का संकेत लगाया गया था। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण ही रिहायशी इलाके के बीच बना यह गड्ढा मासूम बच्चों के लिए मौत का जाल बन गया।
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हादसे की सूचना मिलते ही कुरार विलेज पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। दिव्यांश को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकालकर तुरंत कांदिवली के शताब्दी (डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर) अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इलाके के नागरिक अब इस घोर लापरवाही के लिए निर्माण कंपनी के मालिक और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ सख्त आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल कुरार विलेज पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या निर्माण स्थल पर बीएमसी (BMC) द्वारा निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। निर्माण कंपनी की जिम्मेदारी तय करने के लिए साइट इंजीनियर और सुपरवाइजर के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में सुरक्षा उपायों की कमी या लापरवाही साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।