मुंबई को मिलेगा पहला डबल डेकर रेलवे ब्रिज, 167 करोड़ की एल्फिन्स्टन ROB परियोजना शुरू
Mumbai News: मुंबई का पहला डबल डेकर रेलवे ब्रिज एल्फिन्स्टन में बन रहा है। 167.35 करोड़ की लागत से तैयार यह ब्रिज एक साल में पूरा होगा और शिवड़ी-एमटीएचएल से सीधे जुड़कर ट्रैफिक को बड़ी राहत देगा।
- Written By: सोनाली चावरे
मुंबई का पहला डबल-डेकर रेलवे ब्रिज (pic credit; social media)
Mumbai First Double-Decker Railway Bridge: मुंबई को जल्द ही एक ऐतिहासिक तोहफा मिलने जा रहा है। एल्फिन्स्टन (प्रभादेवी) स्थित 125 साल पुराने रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) को बंद कर अब उसकी जगह डबल डेकर रेलवे ब्रिज बनाया जा रहा है। यह ब्रिज मुंबई का पहला डबल डेकर आरओबी होगा, जो न केवल यातायात को सुगम बनाएगा बल्कि आने वाले समय में शहर की कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महा रेल) को सौंपी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत 167.35 करोड़ रुपये है और इसे एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पुराना पुल और नई चुनौती
एल्फिन्स्टन आरओबी ब्रिटिश शासनकाल में 1913 में बनाया गया था। यह पुल पश्चिमी और मध्य रेलवे को जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट लिंक था। रोजाना हजारों यात्री और वाहन इसका इस्तेमाल करते थे। लेकिन बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव के चलते यह पुल अब शहर की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं था। 12 सितंबर 2025 को इसे आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। अब चुनौती है कि चलती ट्रेनों के बीच पुराने आरओबी को हटाया जाए और नया बनाया जाए। इसके लिए दो 800 एमटी की भारी-भरकम क्रेन लगाई जाएंगी और सभी सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।
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डबल डेकर ब्रिज की खासियत
- नए ब्रिज का डिज़ाइन इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना होगा।
- निचला डेक (लोअर डेक) पर 2+3 लेन और फुटपाथ बनाया जाएगा, जिससे ईस्ट-वेस्ट लोकल ट्रैफिक को राहत मिलेगी।
- ऊपरी डेक (अपर डेक) पर 2+2 लेन होंगी, जो सीधे शिवड़ी-पलीवेटेड कॉरिडोर और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक से जुड़ेंगी।
- इसका सुपर स्ट्रक्चर ‘ओपन वेब गार्डर’ तकनीक पर आधारित होगा, जिसे टिकाऊ और मजबूत माना जाता है।
- भीड़भाड़ वाले स्टेशन को मिलेगी राहत
परेल और प्रभादेवी स्टेशन पर यात्रियों का भारी दबाव है। रोजाना परेल से लगभग 48,149 यात्री और प्रभादेवी से करीब 67,000 यात्री सफर करते हैं। नए ब्रिज से इन स्टेशनों पर भीड़ कम होगी और ट्रैफिक का बोझ भी हल्का होगा।
विरासत और आधुनिकता का मेल
प्रशासन का कहना है कि नया आरओबी केवल आधुनिक ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह मुंबई की ऐतिहासिक धरोहर को सहेजते हुए भविष्य की परिवहन जरूरतों को भी पूरा करेगा। महा रेल के निदेशक राजेश कुमार जायसवाल ने कहा कि “यह सिर्फ इंजीनियरिंग का नमूना नहीं बल्कि मुंबई के बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक होगा। मुंबई के लिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में कनेक्टिविटी और यातायात प्रबंधन का नया अध्याय लिखेगा।
