Nagpur News: मिड-डे मील नीति पर सरकार का खुलासा जल्द, जवाब दायर करने के लिए हाई कोर्ट से मांगा समय

Mid-Day Meal Scheme: मिड-डे मील को लेकर खुलासा करने के लिए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से समय मांगा है। हाईकोर्ट ने सरकार को 3 दिनों की मौहलत दी है।
मिड-डे मील नीति पर सरकार का खुलासा जल्द
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नागपुर: मिड-डे मील को लेकर राज्य सरकार की ओर से 14 अक्टूबर, 2024 को अधिसूचना जारी की गई। इसे चुनौती देते हुए नवसारी की आशा महिला बचत गुट, आविष्कार सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, रक्त रंजित क्रांति बहुउद्देशीय संस्था की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की ओर से सरकारी अधिसूचना पर रोक लगा दी गई थी। साथ ही जवाब दायर करने के आदेश भी दिए गए थे।

अब राज्य सरकार की ओर से नीति पर खुलासा करने के लिए जवाब दायर करने का एक दिन का समय मांगा गया है। इसके बाद हाई कोर्ट ने एक सप्ताह के लिए सुनवाई तो स्थगित कर दी। लेकिन यदि याचिकाकर्ता की ओर से भी कोई अतिरिक्त हलफनामा दायर करना हो तो 3 दिनों में दायर करने कराने के आदेश दिए गये है।

टेंडर के बदले संस्थान को अधिकार

14 अक्टूबर, 2024 की अधिसूचना को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि 16 मार्च, 2019 और 13 मई, 2022 की अधिसूचना के अनुसार स्कूली बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निविदा प्रक्रिया प्रचलित थी। नई अधिसूचना में उसे समाप्त कर दिया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि नई अधिसूचना में मिड-डे मील तैयार करने का कार्य आवंटित करने का अधिकार संबंधित संस्थान के प्रबंधन को दिया गया है। इस तरह से स्कूल प्रबंधन को अधिकार दिए जाने के कारण बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। टेंडर प्रक्रिया पुख्ता और पारदर्शक होने के बावजूद उसे बंद करने की मंशा समझ से परे है।

केवल शिकायतें आने के कारण बदली प्रक्रिया

कोर्ट ने आदेश में कहा कि केवल कुछ शिकायतें आने के कारण राज्य सरकार ने टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया बदलकर अब स्कूल प्रबंधन को अधिकार दिए हैं। इस तरह से विद्यालय प्रबंधन को अधिकार देने से वास्तव में निविदा प्रक्रिया को समाप्त कर देता है और स्कूल प्रबंधन में शक्ति को केंद्रित करता है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए मिड-डे मील तैयार करने की टेंडर प्रक्रिया में याचिकाकर्ता सफल निविदाकर्ता थे। उस सम कार्य आवंटित करने के अवसर से वंचित कर दिए गए हैं जबकि केवल एग्रीमेंट करना बाकी था। कोर्ट का मानना था कि अधिसूचना टेंडर प्रक्रिया के स्वीकार्य पद्धति को अपनाने की बजाय उसे खत्म कर रहा है। 14 अक्टूबर, 2024 की अधिसूचना के खंड (ii) और (iii) के अवलोकन से पता चलता है कि मध्याह्न भोजन तैयार करने का कार्य संबंधित बचत समिति/सोसाइटी को निविदा के माध्यम से आवंटित नहीं किया जाना है।

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