देवेंद्र फडणवीस, राहुल गांधी व असदुद्दीन ओवैसी (डिजाइन फोटो)
BJP AIMIM Congress Alliance: महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर ‘असंभव’ को संभव होते देखा गया है, लेकिन हाल ही में अकोला और अंबरनाथ से जो खबरें आईं, उन्होंने सूबे के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है। सत्ता की भूख और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई में बीजेपी ने कहीं असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM से हाथ मिलाया, तो कहीं कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। हालांकि, इन बेमेल गठबंधनों ने जहां विपक्ष को हमलावर होने का मौका दिया, वहीं पार्टी आलाकमान की नाराजगी ने नेताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अकोला जिले की अकोट नगर पालिका में एक ऐसा गठबंधन देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। यहां बीजेपी पर अक्सर ओवैसी की पार्टी को ‘बी-टीम’ बताने के आरोप लगते थे, लेकिन अकोट में AIMIM बीजेपी के लिए ‘ए-टीम’ यानी मुख्य सहयोगी बनकर उभरी है।
हालिया निकाय चुनावों में बीजेपी की माया धुले ने मेयर का पद तो जीत लिया, लेकिन 35 सदस्यीय सदन में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। बीजेपी के पास केवल 11 सीटें थीं। बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए बीजेपी ने ‘पार्टी विद डिफरेंस’ के अपने नारे को दरकिनार करते हुए ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया। इस मंच में सबसे चौंकाने वाला नाम 5 पार्षदों वाली AIMIM का है।
दिलचस्प बात यह है कि मेयर चुनाव में बीजेपी ने जिस AIMIM प्रत्याशी फिरोजाबी सिकंदर राणा को हराया था, अब वही पार्टी बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है। इस गठबंधन में दोनों शिवसेना, दोनों एनसीपी और प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल हैं। अब आलम यह है कि बीजेपी नेता रवि ठाकुर के जरिए जारी ‘व्हिप’ का पालन ओवैसी के पार्षदों को भी करना होगा।
अकोला के साथ-साथ ठाणे जिले के अंबरनाथ में भी एक अनोखा समीकरण बना। यहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना का खेल बिगाड़ने के लिए बीजेपी और कांग्रेस एक साथ आ गए। अंबरनाथ नगर परिषद की 59 सीटों में से शिंदे सेना को 27 सीटें मिली थीं, जो बहुमत (30) से सिर्फ 3 कम थीं।
शिंदे सेना को सत्ता से दूर रखने के लिए 15 सीटों वाली बीजेपी और 12 सीटों वाली कांग्रेस ने ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बना ली। इस गठबंधन ने शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर को नाराज कर दिया, जिन्होंने इसे “पीठ में छुरा घोंपने” जैसा करार दिया।
इन अप्राकृतिक गठबंधनों की खबर जैसे ही राज्य के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची, हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए इसे अनुशासनहीनता बताया। फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा। यह स्थानीय नेताओं का निजी फैसला हो सकता है, लेकिन पार्टी आलाकमान इसे मंजूरी नहीं देता। ऐसे गठबंधनों को तुरंत रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी पढ़ें:- उद्धव से गठबंधन कर बुरे फंसे राज ठाकरे! MNS में टूट के बीच शिंदे गुट हो रहा मजबूत
इधर कांग्रेस ने भी अंबरनाथ मामले में ‘सफाई अभियान’ शुरू कर दिया है। पार्टी की किरकिरी होते देख कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया और स्थानीय इकाई को भंग कर दिया। इतना ही नहीं, बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले सभी 12 पार्षदों को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
इन दोनों घटनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में विचारधारा के संकट को गहरा कर दिया है। विधानसभा चुनाव में ‘बटेंगे तो कटेंगे’ और ‘एक हैं तो सुरक्षित हैं’ जैसे नारे देने वाली बीजेपी के लिए AIMIM और कांग्रेस के साथ स्थानीय स्तर पर हाथ मिलाना बचाव की स्थिति पैदा कर रहा है।
अकोट में जहां 13 जनवरी को होने वाले डिप्टी मेयर चुनाव में यह गठबंधन अपनी ताकत दिखाएगा, वहीं अंबरनाथ में गठबंधन टूटने के बाद अब सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय राजनीति में ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ होता है, भले ही इसके लिए पार्टी की विचारधारा की बलि क्यों न देनी पड़े।