artificial intelligence in agriculture (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra AI Farming: महाराष्ट्र कृषि-कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति 2025–2029 के तहत मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में ‘जागतिक कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता परिषद और निवेशक शिखर सम्मेलन’ (एआई फॉर एग्री 2026) का आयोजन किया गया। इस परिषद में संस्थागत वित्तीय संरचना के माध्यम से ‘ट्रस्ट इंजन’ विषयक परिसंवाद में विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि बाजारपेठ की स्थिरता ही कृषि विकास की असली कुंजी है।
परिषद में सह्याद्री फार्म्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विलास शिंदे, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक संजीव डी. रोहिल्ला, Acumen के सहयोगी निदेशक पराग सभलोक और नीदरलैंड दूतावास की कृषि सलाहकार मेरियन वैन शायक ने परिसंवाद में भाग लिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि उत्पादन के आंकड़े, अधिशेष और असफलताओं के बाजार से मिलने वाले संकेत सैकड़ों वर्षों से कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इसलिए सरकार की सक्रिय भूमिका के साथ-साथ सशक्त बाजारपेठ और जोखिम प्रबंधन के लिए नवीन साधनों की आवश्यकता है।
देश में लगभग 48 प्रतिशत खेती महिलाएं करती हैं, फिर भी अधिकांश एआई मॉडल पुरुष-केंद्रित डेटा पर आधारित हैं। महिलाओं को डिजिटल संसाधन, प्रशिक्षण और जमीन के अधिकार दिए बिना कृषि में एआई का समावेशी उपयोग संभव नहीं है।
नीदरलैंड में सरकार, निजी क्षेत्र और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ‘हब’ संकल्पना के तहत उत्पादक, लॉजिस्टिक्स, बैंक और उपभोक्ताओं को एक मंच पर लाया जाता है। मेरियन वैन शायक ने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी और नवाचार हब मॉडल भारत में भी प्रभावी हो सकता है।
नंदन नीलेकणी ने कहा कि एआई कृषि क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी साधन है। स्थानीय भाषाओं में वॉयस-आधारित एआई से किसानों को सीधे उपयोगी उत्तर मिलते हैं। ‘महा विस्तार’ जैसे उपक्रमों से महाराष्ट्र एआई आधारित कृषि में अग्रणी राज्य बन रहा है।
विलास शिंदे ने बताया कि किसान तब तक किसी तकनीक में निवेश नहीं करते, जब तक यह स्पष्ट न हो कि उससे उत्पादन बढ़ता है, लागत घटती है और आय में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के दावों की बजाय किसानों के बीच ‘पीयर वैलिडेशन’ अधिक प्रभावी होता है।
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राहिबाई पोपेरे ने कहा कि प्रकृति ही उनकी शाला और गुरु है, लेकिन तकनीक ने जीवन सुगम बनाया है। उन्होंने रासायनिक खेती से बचने और जंगली सब्जियों की खेती बढ़ाने का आह्वान किया। सम्मेलन में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।