11वीं प्रवेश में मनमानी फीस का आरोप, पालकों के आर्थिक शोषण पर कार्रवाई की मांग
School Fee Controversy: महागांव और जिले के कई निजी विद्यालयों एवं कनिष्ठ महाविद्यालयों में 11वीं प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त शुल्क और डोनेशन वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं।
- Written By: महाराष्ट्र डेस्क
Donation Collection (सोर्सः एआय जनरेटेड प्रतिकात्मक फोटो-सोशल मीडिया)
Mahagaon Fee Regulation: तहसील सहित जिले के निजी विद्यालयों और कनिष्ठ महाविद्यालयों में कक्षा 11वीं की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त शुल्क और डोनेशन लेकर विद्यार्थियों का आर्थिक शोषण किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने माध्यमिक शिक्षणाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस आर्थिक लूट पर रोक लगाने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षणाधिकारी ने संबंधित कनिष्ठ महाविद्यालयों को ऑनलाइन पोर्टल पर निर्धारित शुल्क ही लेने के निर्देश दिए तथा अतिरिक्त शुल्क की मांग नहीं करने की चेतावनी दी।
इससे मनमाना शुल्क वसूलने वाले संस्थानों में खलबली मच गई है। संविधान में प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान किया है। इसके बावजूद तहसील सहित जिले के कई शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा के व्यवसायीकरण की तस्वीर सामने आ रही है। कक्षा 11वीं, 12वीं तथा अन्य कक्षाओं में प्रवेश के लिए शासन द्वारा निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त हजारों रुपये वसूले जाने की शिकायतें भारतीय विद्यार्थी मोर्चा को प्राप्त हुई हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के किसान, खेत मजदूर, श्रमिक तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
महागांव में शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ आवाज
कई संस्थानों में अधिकृत शुल्क के अलावा डोनेशन और विशेष शुल्क के नाम पर रकम वसूली जा रही है। अभिभावकों के अनुसार कला संकाय में प्रवेश के लिए 5 से 6 हजार रुपये, वाणिज्य संकाय के लिए 5 से 10 हजार रुपये तथा विज्ञान संकाय के लिए 10 हजार से 30-35 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह विद्यार्थियों के शिक्षा के मूलभूत अधिकार पर सीधा आघात है। अनेक अभिभावक शिकायत करना चाहते हैं, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य, शैक्षणिक परेशानियों और संस्थानों के संभावित दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। शिक्षा समाज निर्माण का माध्यम है, लेकिन कुछ संस्थानों द्वारा इसका व्यावसायीकरण किया जा रहा है। इसलिए इस पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करना आवश्यक है।
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सभी संस्थाएं शुल्क का रेट सार्वजनिक करें
- जिले के सभी निजी विद्यालयों और कनिष्ठ महाविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया की विशेष जांच की जाए।
- शासन द्वारा निर्धारित शुल्क संरचना का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच की जाए।
- डोनेशन अथवा अन्य नामों से अतिरिक्त राशि वसूलने वाले संस्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
- अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए गोपनीय शिकायत दर्ज करने की स्वतंत्र व्यवस्था बनाई जाए।
- सभी संस्थानों को अपनी शुल्क संरचना सार्वजनिक रूप से घोषित करने के निर्देश दिए जाएं, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को बिना किसी आर्थिक दबाव के प्रवेश की गारंटी दी जाए।
- पूरे मामले की जिला स्तरीय समिति से जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए आदि मांगे भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के जिलाध्यक्ष जयशील कांबले सहित अन्य पदाधिकारियों ने अपने ज्ञापन व्दारा की है।
