सुशांत शेलार ने विजय पाटकर पर लगाए 57 लाख के घोटाले के आरोप, जानें क्या हैं मराठी चित्रपट महामंडल विवाद की जड?
Vijay Patkar Corruption Allegations: चित्रपट महामंडल चुनाव में घमासान! अभिनेता सुशांत शेलार ने शिवसेना उपनेता सुषमा अंधारे पर कसा तंज। जानें शेलार ने विजय पाटकर पर लगाए भ्रष्टाचार के क्या हैं आरोप?
- Written By: गोरक्ष पोफली
सुशांत शेलार व विजय पाटकर (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Marathi Chitrapat Mahamandal Election: महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चलता रहता है, लेकिन अब यह खींचतान कला और सिनेमा के गलियारों तक पहुँच गई है। अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल के चुनावों ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस चुनाव ने नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ताजा मामला अभिनेता सुशांत शेलार ने शिवसेना नेता सुषमा अंधारे पर तंज कसा व विजय पाटकर पर आरोप भी लगाए हैं।
सुषमा अंधारे का आरोप और सुशांत शेलार का पलटवार
विवाद की शुरुआत तब हुई जब दिग्गज अभिनेता विजय पाटकर ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक दबाव के चलते चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने से रोका गया। इस मुद्दे पर सुषमा अंधारे ने सरकार और सत्ताधारी दल के नेताओं पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि नेता अभिनेताओं की तरह व्यवहार करें तो ठीक है, लेकिन यदि वे कलाकारों के अधिकार क्षेत्र और उनके कलाक्षेत्र पर कब्जा करने लगें, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुषमा अंधारे के इस बयान पर अभिनेता और शिंदे गुट के नेता सुशांत शेलार ने बेहद कड़ा और व्यक्तिगत तंज कसा। शेलार ने अंधारे की बोलने की शैली और उनके हाव-भाव पर निशाना साधते हुए कहा, गर्दन इधर-उधर घुमाने से अगर आप खुद को अभिनेत्री समझती हैं, तो आप भी अभिनेत्री बन जाइए और चुनाव लड़िए। उन्होंने आगे कहा कि नीलम शिर्के एक स्थापित अभिनेत्री हैं और उन्हें चुनाव लड़ने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।
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विजय पाटकर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
सुशांत शेलार ने केवल सुषमा अंधारे को ही नहीं घेरा, बल्कि विजय पाटकर के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पाटकर पर पलटवार करते हुए उनके कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं का दावा किया। शेलार ने आरोप लगाया कि
- विजय पाटकर के कार्यकाल में मानाचा मुजरा कार्यक्रम के आयोजन में भारी भ्रष्टाचार हुआ।
- जो कार्यक्रम 15 से 16 लाख रुपये में हो सकता था, उसके लिए महामंडल के खजाने से 57 लाख रुपये खर्च किए गए।
- ऑडिट रिपोर्ट में 10 लाख 78 हजार रुपये का अंतर पाया गया है।
शेलार ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय ने विजय पाटकर का निदेशक पद पहले ही रद्द कर दिया था, इसलिए उनके द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक दबाव के आरोप पूरी तरह निराधार और झूठे हैं।
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शेलार का दावा
शेलार ने दावा किया है कि वित्तीय अनियमितताओं के कारण पाटकर की सदस्यता रद्द कर दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप उनके पास चुनाव लड़ने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बचा है। शेलार ने विजय पाटकर की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए और पूछा कि वे अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए स्वयं क्यों नहीं आए। उन्होंने पाटकर को चुनौती दी है कि यदि उन पर किसी मंत्री का दबाव था या उनके पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई कॉल रिकॉर्डिंग या सबूत है, तो उसे पेश करें।
धनाजी यमकर ने की आलोचना
धनाजी यमकर ने भी पाटकर के रुख की कड़ी आलोचना की है, विशेष रूप से पाटकर द्वारा संस्था को कब्र कहे जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। यमकर ने सवाल उठाया कि जिस अध्यक्ष की कुर्सी पर पाटकर बैठ चुके हैं, उसी संस्थान के बारे में ऐसी टिप्पणी करना कितना उचित है। उन्होंने पाटकर पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें केवल घर बैठकर शिकायत करने के बजाय इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए कि उनके अपने ही लोगों ने उनका फॉर्म खारिज कर दिया है।
विवाद का मुख्य कारण
इस विवाद की मुख्य जड़ पुराने वित्तीय लेन-देन के सबूत हैं, जिन्हें चुनाव के दौरान विरोधियों का मानसिक मनोबल गिराने के लिए सामने लाया जा रहा है। वर्तमान में पूरी फिल्म इंडस्ट्री की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाटकर इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देते हैं। साथ ही, चुनाव निर्णय अधिकारी इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं, यह भी चुनाव के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
