कला में राजनीति बर्दाश्त नहीं, विजय पाटकर को नामांकन से रोकने पर यशोमती ठाकुर ने सरकार को घेरा

Yashomati Thakur Statement: मराठी चित्रपट महामंडल चुनाव में अभिनेता विजय पाटकर को नामांकन से रोकने पर यशोमती ठाकुर का बड़ा हमला। राजनीति के निर्विरोध पैटर्न को कला क्षेत्र में थोपने का लगाया आरोप।
Politics Has No Place in the Arts: Yashomati Thakur Slams Government for Blocking Vijay Patkar's Nomination
विजय पाटकर व यशोमती ठाकूर (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Yashomati Thakur News: महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय विधान परिषद चुनावों की सरगर्मी तेज है, लेकिन इसी बीच एक नया विवाद अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल (मराठी फिल्म कॉरपोरेशन) के चुनावों को लेकर खड़ा हो गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राजनीति की तरह अब कला के क्षेत्र में भी निर्विरोध चुनाव थोपने की कोशिश की जा रही है, जो संवैधानिक लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक है।

क्या है पूरा विवाद?

तकरीबन 10 साल के लंबे अंतराल के बाद अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल के चुनाव होने जा रहे हैं। चर्चा थी कि इस बार मुकाबला दिग्गज अभिनेता विजय पाटकर और मेघराज भोसले के बीच होगा। विजय पाटकर ने 2014 से 2016 तक इस महामंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। पाटकर का आरोप है कि उन्होंने चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र कोल्हापुर भेजा था, लेकिन सत्ताधारी दल के दबाव के कारण उन्हें फॉर्म भरने ही नहीं दिया गया।

मंत्री के OSD पर गंभीर आरोप

विजय पाटकर के इन आरोपों को बल देते हुए यशोमती ठाकुर ने ट्वीट कर सत्ता पक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मौजूदा मंत्री के OSD कोल्हापुर में बैठकर इस पूरी चुनाव प्रक्रिया को मैनेज कर रहे हैं। ठाकुर ने कहा, साम, दाम, दंड, भेद का उपयोग कर चुनावों को जबरन निर्विरोध करना एक घातक प्रवृत्ति बन गई है। स्थानीय निकाय चुनावों में तो सत्ताधारियों ने इसका इसका उपयोग किया ही था, अब यह कला क्षेत्र में भी घुस रहा है।

कलाकारों से एकजुट होने की अपील

यशोमती ठाकुर ने मराठी फिल्म जगत के कलाकारों, कला प्रेमियों और भाषा प्रेमियों से इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विजय पाटकर जैसे वरिष्ठ कलाकार को चुनाव लड़ने से रोकना गंभीर मामला है। यदि कला के क्षेत्र में भी राजनीतिक दबाव के जरिए चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया जाएगा, तो कलाकारों की स्वतंत्रता और स्वाभिमान का क्या होगा?

राजनीतिक गलियारों में हलचल

एक तरफ जहाँ सोलापुर विधान परिषद सीट को निर्विरोध करने की तैयारी चल रही है, वहीं चित्रपट महामंडल के चुनावों में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप ने विवाद को और हवा दे दी है। विजय पाटकर की नाराजगी और यशोमती ठाकुर के तीखे हमलों के बाद अब देखना यह होगा कि क्या कला क्षेत्र इस राजनीतिक दबाव के आगे झुकता है या स्वतंत्र चुनाव की राह चुनता है।

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