मौत के बाद भी असुविधा का दंश, बारिश में घंटों भीगता रहा शव; कोल्हापुर का मामला

दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मौत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय 1 घंटे तक स्ट्रेचर पर भारी बारिश में भीगता हुआ छोड़ दिया गया। घटना कोल्हापुर के छत्रपति प्रमिलाराजे अस्पताल की है।
1 घंटे तक भारी बारिश में भीगता रहा शव
1 घंटे तक भारी बारिश में भीगता रहा शव (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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कोल्हापुर: सरकारी अस्पताल में प्रशासनिक लापरवाही की परिसिमा पार करने वाली एक चौंकाने वाली घटना गुरुवार को कोल्हापुर के छत्रपति प्रमिलाराजे अस्पताल (सीपीआर) से सामने आई। इलाज के दौरान एक दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मौत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय एक घंटे तक स्ट्रेचर पर भीगता हुआ छोड़ दिया गया। मौत के बाद भी इस लापरवाही के कारण सीपीआर प्रशासन की बदइंतजामी के खिलाफ नागरिकों में गहरा गुस्सा है।

मृतक के कपड़ों में गजानन वाल्वेकर (उम्र 50, निवासी गडमुडशिंगी) नाम का नोट मिला है। हालांकि, उसमें पूरा पता नहीं मिल पाया है। इसलिए लक्ष्मीपुरी पुलिस ने आगे की जांच के लिए गांधीनगर पुलिस को इसकी सूचना दे दी है और संबंधित व्यक्ति की पहचान करने का काम चल रहा है।

वास्तव में क्या हुआ

बुधवार को दोपहर 12:30 बजे के करीब गडमुडशिंगी रोड पर एक होटल के सामने हुए एक्सीडेंट में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तुरंत 108 एम्बुलेंस में सीपीआर के लिए भर्ती कराया गया। गुरुवार (3 तारीख) को सुबह 11 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद एक वार्ड बॉय और एक महिला संविदाकर्मी शव को स्ट्रेचर पर लादकर दुर्घटना विभाग के बगल में स्थित पुलिस थाने ले गए, ताकि शव की पहचान हो सके और पुलिस में जानकारी हेतु रेकॉर्ड दिया जा सके।

असंवेदनशिलता का चित्र

लेकिन उसी समय तेज बारिश शुरू हो गई। चूंकि थाने में कोई नहीं था और उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, इसलिए शव स्ट्रेचर पर ही बारिश में भीगता रहा। करीब एक घंटे तक यही चलता रहा, लेकिन शव को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कोई आगे नहीं आया।

मृतक की पहचान के प्रयास जारी

अंत में अन्य कर्मचारियों द्वारा पुलिस से संपर्क करने और शव की सभी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एक तरफ व्यक्ति की आकस्मिक मौत और दूसरी तरफ प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण मौत के बाद भी हुई उपेक्षा, इस घटना ने सीपीआर प्रशासन की कार्यप्रणाली और मृतक की गरिमा-सम्मान करने के बारे में भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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