Water Crisis News: जालना जिले में जल संकट की आहट, 7 प्रमुख परियोजनाओं में केवल 36% पानी शेष, स्थिति गंभीर
Jalna Water Crisis: जालना जिले में बढ़ती गर्मी के कारण जलस्तर में भारी गिरावट। 10 लघु परियोजनाएं डेड स्टोरेज में पहुँचीं। जानें जुई बांध और अन्य जलाशयों की ताजा रिपोर्ट।
- Written By: गोरक्ष पोफली
जालना में जलसंकट की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ground Water Depletion Jalna: महाराष्ट्र के जालना जिले में भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही जल संकट (Water Crisis) गहराने लगा है। अप्रैल का आधा महीना बीतते ही जिले के प्रमुख जलस्रोतों के स्तर में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। लघु पाटबंधारे विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जिले की मध्यम और लघु परियोजनाओं में जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिससे आने वाले मई और जून के महीनों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है।
परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति: एक नजर में
जिले में कुल 67 जल परियोजनाएं (7 मध्यम और 60 लघु) हैं, जिनमें वर्तमान में सभी परियोजनाओं को मिलाकर केवल 36.21 प्रतिशत पानी शेष है। 7 मध्यम परियोजनाओं में 52.24% (34.37 दलघमी) पानी उपलब्ध है। 60 लघु जलाशयों की स्थिति अधिक नाजुक है, जहाँ केवल 31.19% (65.55 दलघमी) पानी बचा है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि जिले की 10 लघु जल परियोजनाएं अपने ‘डेड स्टोरेज’ (न्यूनतम स्तर) तक पहुँच चुकी हैं, जिसका अर्थ है कि अब उनसे पानी खींचना लगभग असंभव है।
गर्मी और वाष्पीकरण का दोहरा वार
पिछले साल सितंबर के अंत में हुई अच्छी बारिश के कारण जलस्रोत पूरी तरह भर गए थे, जिससे उम्मीद थी कि इस साल गर्मियों में परेशानी नहीं होगी। हालांकि, इस वर्ष बढ़ते तापमान और तीव्र वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण पानी का भंडार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से घट रहा है।
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क्षेत्रवार स्थिति:
- जुई बांध: भोकरदन शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले इस बांध में अब केवल 27.20% पानी बचा है।
- कल्याण व गिरिजा: जालना तहसील की इन परियोजनाओं में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर (64-68%) है।
- प्रभावित क्षेत्र: बरंजला, प्रल्हादपुर, रेलगांववाड़ी, शिंदी, और पाटोदा जैसे क्षेत्रों के लघु जलाशयों में पानी सूखने की कगार पर है।
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प्रशासन और नागरिकों के लिए चेतावनी
जैसे-जैसे मई और जून करीब आ रहे हैं, कृषि और पेयजल के लिए पानी की मांग बढ़ती जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि जल प्रबंधन पर अभी से ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीण इलाकों में टैंकरों की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध 99.92 दलघमी पानी का उपयोग बहुत ही मितव्ययिता (Sparing use) के साथ करना होगा। नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे पानी की बर्बादी रोकें और वर्षा जल संचयन जैसे दीर्घकालिक उपायों पर विचार करें। फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन “डेड स्टोरेज” में पहुँचती परियोजनाएं भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
