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Jalna में कांग्रेस की पकड़ ढीली, दल-बदल से कमजोर होता संगठन; भाजपा को फायदा
- Written By: अंकिता पटेल
Jalna Congress Crisis: जालना में कांग्रेस आंतरिक कलह और दल-बदल से कमजोर होती नजर आ रही है। कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, पार्षदों की बगावत और नेतृत्व की कमजोरी से संगठन पर संकट गहराया है।

Party Infighting Maharashtra( Source: Social Media )
Congress Party Internal Crisis: जालना जिले को राजनीति में कभी मजबूत माने जाने वाले कांग्रेस के गढ़ को इन दिनों आंतरिक कलह और अवसरवादी राजनीति ने कमजोर कर दिया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हो रही टूट को रोकने के बजाय कई नेताओं पर पार्टी में रहते हुए ही विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लग रहे है।
नेताओं के लगातार दल-बदल और जनप्रतिनिधियों की बगावत के कारण जिले में कांग्रेस का चुनाव चिन्ह ‘हाथ’ अपने ही अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद जालना शहर में कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे भाजपा में शामिल हो गए, जबकि कुछ नेताओं ने चुनावी माहौल के बीच ही पार्टी छोड़ दी।
इन वरिष्ठ पदाधिकारियों के जाने से जिला मुख्यालय जालना में कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति काफी कमजोर हो गईहै। लगातार दस वर्षों तक जिस नगर परिषद पर कांग्रेस का प्रभाव था, वह सत्ता भी हाथ से निकल गई और नई बनी महानगरपालिका में भी आंतरिक विवादों के कारण सत्ता भाजपा के हाथों में चली गई।
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निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी और नेतृत्व के कमजोर प्रभाव से पार्टी की ताकत नाममात्र के लिए रह गई है। हाल ही में महानगरपालिका में विपक्ष में बैठने का अवसर होने के आवजूद कांग्रेस के नी में से सात पार्षदों ने पार्टी के आधिकारिक निर्णय को नजरअंदाज करते हुए भाजपा से जुडे उम्मीदवार को समर्थन दे दिया।
इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में काफी हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने सात पार्षदों समेत कुछ प्रमुख पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। राजनीतिक पदों का लाभ उठाने वाले कई नेता अपने भविष्य के लिए अन्य दलों में चले गए, लेकिन वर्षों से पार्टी का झंडा उठाए रखने वाले कार्यकर्ताओं को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है।
फिर से जनाधार बढ़ाने की जरूरत
वर्तमान में सांसद डॉ कल्याण काले, विधायक राजेश राठोड, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र राख और जिला अध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख के कंधों पर पार्टी की जिम्मेदारी है।
लेकिन एक तरफ पाटी छोड़कर जाने वाले नेता और दूसरी और पार्टी में रहकर विरोधी गतिविधिया करने वाले पदाधिकारी इन दोनों स्थितियों के बीच नेतृत्व खुद को कठिन परिस्थिति में पाता दिखा रहा है, देश से लेकर स्थानीय स्तर तक कांग्रेस की स्थिति कमजोर मानी जा रही है और जालना अब पहली बार जालना शहर की स्थिति भी इससे अलग नहीं है।
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ऐसे में केवल निलंबन की कार्रवाई से क्या पार्टी दोबारा मजबूत हो पाएगी, यह सवाल राजनीतिक हलकों में उठने लगा है। पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए नेतृत्व को कठोर संगठनात्मक निर्णय लेने की जरूरत बताई जा रही है।
केंद्रीय नेतृत्व को कठोर निर्णय लेना जरूरी
ऐसे में पाटी नेतृत्व के सामने सबसे चड़ी चुनौती इन कार्यकर्ताओं का विश्वास फिर से जीतना है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख ने कहा कि सत्ता के लिए पार्टी निष्ठा से समझौता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर संगठन को शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि खाली हुई जगह नए और ईमानदार कार्यकताओं को मौका देने का अवसर है और पार्टी को फिर से मजबूत किया जाएगा,
Jalna congress crisis internal conflict defections maharashtra politics
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