जलगांव में बड़ा सियासी उलटफेर: उन्मेष पाटिल शिंदे की शिवसेना में शामिल, भाजपा के गढ़ में मची खलबली
Unmesh Patil Joins Shiv Sena Shinde: जलगांव के पूर्व सांसद उन्मेष पाटिल ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना जॉइन की है। इस कदम से जलगांव भाजपा और गिरीश महाजन के लिए मुश्किलें बढ़ने की संभावना है।
- Written By: अनिल सिंह
Unmesh Patil Joins Shiv Sena Shinde (फोटो क्रेडिट-X)
Jalgaon Politics Update Unmesh Patil: महाराष्ट्र के उत्तर मध्य क्षेत्र जलगांव की राजनीति में सोमवार, 9 मार्च 2026 को एक बड़ा सियासी धमाका हुआ है। शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद उन्मेष पाटिल ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। पाटिल की इस ‘घर वापसी’ ने न केवल विपक्षी खेमे को कमजोर किया है, बल्कि जलगांव भाजपा के भीतर भी बेचैनी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद उन्मेष पाटिल का स्वागत किया और उन्हें जलगांव का ‘भावी नेतृत्व’ बताकर भविष्य के समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है।
उन्मेष पाटिल का यह कदम जलगांव के कद्दावर मंत्री गिरीश महाजन के वर्चस्व के खिलाफ एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पाटिल ने पिछले कुछ समय से किसान आंदोलनों के जरिए क्षेत्र में भाजपा की घेराबंदी कर रखी थी, लेकिन अब सत्ताधारी गुट का हिस्सा बनकर उन्होंने खुद को राजनीतिक रूप से अधिक सुरक्षित और आक्रामक स्थिति में ला खड़ा किया है।
बीजेपी के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
उन्मेष पाटिल का प्रभाव जलगांव की कई विधानसभा सीटों पर है। 2019 में वे भाजपा के सांसद थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में उनका टिकट काटकर स्मिता वाघ को दे दिया गया था। तभी से पाटिल और गिरीश महाजन के बीच ‘कोल्ड वार’ जारी था। अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होकर पाटिल ने भाजपा के भीतर अपने विरोधियों को सीधे तौर पर ‘चेकमेट’ किया है। शिंदे गुट में उनकी एंट्री से जलगांव में शिवसेना (शिंदे) और भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे और स्थानीय वर्चस्व को लेकर नया संघर्ष शुरू होने के आसार हैं।
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राजनीतिक ‘सुरक्षा’ और रणनीति
जलगांव के गलियारों में चर्चा है कि वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे के खिलाफ जारी कानूनी कार्रवाइयों को देखते हुए उन्मेष पाटिल ने समय रहते पाला बदलना बेहतर समझा। वे जानते थे कि विपक्ष में रहकर सत्ता के प्रहारों का सामना करना कठिन होगा। महायुति का हिस्सा बनकर उन्होंने न केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाई है, बल्कि मुख्यमंत्री शिंदे के करीब जाकर जलगांव में भाजपा के एकाधिकार को चुनौती देने का नया मंच भी तैयार कर लिया है।
मुख्यमंत्री का बड़ा संकेत
उन्मेष पाटिल के शामिल होते ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें ‘जलगांव का भावी सांसद’ कहकर संबोधित किया। इस बयान ने भाजपा खेमे में खलबली मचा दी है, क्योंकि वर्तमान में जलगांव की सीट भाजपा के पास है। इसी बीच विधायक मंगेश चव्हाण की एक कथित ऑडियो क्लिप के वायरल होने से तनाव और बढ़ गया है। यह साफ है कि उन्मेष पाटिल की यह एंट्री आने वाले नगर निगम और लोकसभा चुनावों में महायुति के भीतर ही एक नई जंग का आगाज कर सकती है।
