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जलगांव में मधुमक्खी पालन पर जागरूकता कार्यक्रम, किसानों की आय बढ़ाने का प्राकृतिक साधन

Jalgaon Honey Bee Farming: मधुमक्खी पालन से फसलों का उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में सीधा इजाफा होता है, ऐसा विशेषज्ञ संजय मारने ने जलगांव में कहा।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Feb 17, 2026 | 10:05 AM

प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )

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Jalgaon Pollination Beekeeping Benefits: जलगांव पुणे के डायरेक्टर और इंडियन नेचुरल हनी बीज के विशेषज्ञ संजय मारने ने कहा कि खेती में पॉलिनेशन (परागण) के लिए मधुमक्खियों का अत्यधिक महत्व है। मधुमक्खियां बागों, सब्जियों और तिलहन फसलों में उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में सीधी मदद मिलती है।

वे जैन इरिगेशन के चेयरमैन अशोक जैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत जैन के मार्गदर्शन में आयोजित ‘मधुमक्खी पालन जागरूकता कार्यक्रम’ में बोल रहे थे। कार्यक्रम के दौरान मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों और उनके आर्थिक लाभों पर विस्तृत जानकारी दी गई।

एपिस सेराना इंडिका, एपिस मेलिफेरा, एपिस डोरसाटा (रॉक बी) और एपिस फ्लोरिया (लिटिल बी) जैसी प्रजातियों के स्वभाव और शहद उत्पादन की क्षमता के बारे में बताया गया।

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विशेषज्ञों ने बताया कि केवल शहद ही नहीं, बल्कि मधुमक्खी का मोम, पॉलेन, रॉयल जेली, प्रोपोलिस और मधुमक्खी का जहर भी औषधीय और आर्थिक रूप से अत्यंत मूल्यवान है। मधुमक्खी पालन के रखरखाव, बॉक्स मैनेजमेंट, रानी मधुमक्खी की भूमिका और बीमारियों पर नियंत्रण के तरीकों को बारीकी से समझाया गया।

इकोलॉजिकल बैलेंस और शपथ

कार्यक्रम में रनों बीज-नों फूडर के कॉन्सेप्ट की समझाते हुए बताया गया कि यदि मधुमक्खियां नहीं होगी, तो मानव जाति के लिए भौजन का संकट खड़ा हो जाएगा।

अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में शपथ ली कि वे मधुमक्खियों की रक्षा करेंगे, इको फ्रेंडली खेती को बढ़ावा देंगे और कीटनाशकों (पेस्टिसाइड) का सीमित इस्तेमाल करेंगे।

इस मौके पर यवतमाल एग्रीकल्चर कॉलेज के प्रेसिडेंट प्रदीप वादाफले, अमरावती के दिगंबर भुयार और नासिक के विजय चौडेकर सहित कई गणमान्य उपस्थित थे,

पूरक व्यवसाय के रूप में अवसर

जैन इरिगेशन के एग्रीकल्चर डिफर्टमेंट के संजय सोनजे और पनजी पार्क के सीएसओ दीपक चौधरी ने बताया कि मधुमक्खी पालन को एक कॉमीलमेट्री बिजनेस (पूरक व्यवसाय) के तौर पर अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते है।

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रिटायर्ड फॉरेस्ट अधिकारी पी. टी. पाटिल और प्रोग्रेसिव किसान एस. आर. पाटिल ने भी अपने अनुभव साझा किए, कार्यक्रम का प्रास्ताविक और आभार प्रदर्शन राजेंद्र राणे ने किया, इस पहल से जलगांठ के किसानों में मधुमक्खी पालन को लेकर एक नई चेतना जागृत हुई है।

Jalgaon beekeeping pollination farm income sustainable farming

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Published On: Feb 17, 2026 | 10:05 AM

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