मीरा भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar News In Hindi: मीरा-भाईंदर मनपा की पहली आमसभा करीब साढ़े तीन साल के अंतराल के बाद बुधवार 18 फरवरी को होने जा रही है।
यह आमसभा सियासी शक्ति प्रदर्शन का मंच बनने की संभावना व्यक्त की जा रही है। सत्ताधारी भाजपा ने एक साथ कई ऐसे प्रस्ताव पेश कर दिए हैं, जिनसे शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
हजरत टीपू सुल्तान चौक का नाम बदलने से लेकर उत्तन में कत्लखाना आरक्षण खत्म करने, क्लस्टर योजना रह करने और डेवलपमेंट प्लान (डीपी) को नए सिरे से तैयार करने तक, इन मुद्दों पर आमसभा में तीखी बहस और हंगामे के पूरे आसार हैं।
मीरारोड पूर्व के नयानगर स्थित हजरत टीपू सुल्तान चौक का नाम बदलने का प्रस्ताव सबसे ज्यादा चर्चा में है। वर्ष 2016 की आमसभा में इस चौक का नामकरण किया गया था। मनपा प्रशासन 2021 के निर्णय का हवाला देते हुए नाम परिवर्तन को असंभव बता रही है। हालांकि, भाजपा का तर्क है कि पूर्व में नाट्यगृह के नामकरण में बदलाव का उदाहरण मौजूद है।
यह मुद्दा पहले भी राजनीतिक दलों की बीच ध्रुवीकरण का कारण बन चुका है, ऐसे में इस बार भी वातावरण गरमाने की संभावना है। भाईंदर पश्चिम के उत्तन क्षेत्र में 4,700 वर्ग मीटर जमीन पर वर्ष 2017 में कत्लखाना आरक्षित किया गया था यह आरक्षण मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा किया गया था।
अब इसे निरस्त करने का प्रस्ताव लाया गया है। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता मनपा चुनाव के दौरान इसे खत्म करने का वादा कर चुके हैं। प्रस्ताव पारित होने के बाद अंतिम निर्णय राज्य सरकार के हाथ में होगा। यह मुद्दा भी धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है।
वर्ष 2023 में प्रशासनिक कार्यकाल में लागू की गई एकीकृत विकास (क्लस्टर) योजना को रद्द करने का प्रस्ताव भी आमसभा में रखा गया है। भाजपा का कहना है कि मीरा-भाईंदर में क्लस्टर के 24 जोन बनाए गए है, कई इलाकों में सड़क और मूलभूत सुविधाओं का समुचित नियोजन नहीं है।
यह योजना व्यवहारिक नहीं है। जबकि हाल ही में मंत्रालय की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस योजना को शहर के लिए उपयुक्त बताया था। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक भी कलस्टर और मिनी क्लस्टर योजना शहर में लागू करने का श्रेय ले चुके हैं और वे भी इस योजना के पक्षधर है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर भाजपा इसका विरोध कर रही है, जिससे स्थानीय राजनीति गरमाने के संकेत हैं।
खजाने की चाबी किसके हाथ पहली आमसभा में स्थायी समिति के 16 सदस्यों की नियुक्ति भी की जाएगी, जिसमें सदस्यों के संख्याबल के अनुसार 13 सदस्य भाजपा के, 2 कांग्रेस के और 1 शिंदे शिवसेना के होंगे। स्थायी समिति को मनपा के वित्तीय फैसलों और निविदाओं की ‘खजाने की चाबी’ माना जाता है। इसके साथ ही महिला एवं बाल कल्याण समिति, परिवहन समिति और वृक्ष प्राधिकरण का गठन भी होना है।
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21 सड़कों का सीमेंटीकरण, फाउंटेन गायमुख रोड का चौड़ीकरण, बाढ़ मुक्त मीरा-भाईंदर योजना, संपत्ति कर दरों में बदलाव, बाजार वसूली शुल्क में संशोधन आदि महत्वपूर्ण विषय भी इस आमसभा में लाए गए हैं। नामकरण, आरक्षण और विकास योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों ने पहले ही सियासी पारा चढ़ा दिया है। अब सबकी नजरें आमसभा पर टिकी हैं, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव लगभग तय माना जा रहा है।
ठाणे से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट